Saturday, March 7, 2026
- Advertisement -

सरसों की खेती

KHETIBADI


देश में सरसों के तेल की बढ़ती मांग और दाम को देखते हुए सरसों की खेती में किसानों के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसके पौधे को पूर्ण रूप से बढ़ने और अच्छी उपज प्राप्त के लिए पोषक तत्वों की बेहद जरूरत होती है। अगर किसी एक पोषक तत्व का भी अभाव हो जाए, तो पौधे में उपज क्षमता कम हो जाती है।

भूमि का चुनाव और तैयारी
-सरसों की खेती में दोमट या बलुई भूमि जिसमें जल का निकास अच्छा हो अधिक उपयुक्त होती है।
-पानी के निकास का समुचित प्रबंध न हो तो प्रत्येक वर्ष लाहा लेने से पूर्व ढेचा को हरी खाद के रूप में उगाना चाहिए।
-अच्छी पैदावार के लिए जमीन का पी.एच.मान. 7 होना चाहिए।
अत्यधिक अम्लीय एवं क्षारीय मिट्टी इसकी खेती हेतु उपयुक्त नहीं होती है।
-सिंचित क्षेत्रों में खरीफ फसल के बाद पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और उसके बाद तीन-चार जुताइयां तवेदार हल से करनी चाहिए।
-सिंचित क्षेत्र में जुताई करने के बाद खेत में पाटा लगाना चाहिए, जिससे खेत में ढेले न बनें।
-गर्मी में गहरी जुताई करने से कीड़े मकौड़े व खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।
-बुवाई से पूर्व भूमि में नमी की कमी है, तो खेत में पलेवा करना चाहिए।
-बुवाई से पूर्व खेत खरपतवार रहित होना चाहिए।
-बारानी क्षेत्रों में प्रत्येक बरसात के बाद तवेदार हल से जुताई कर नमी को संरक्षित करने के लिए पाटा लगाना चाहिए, जिससे कि भूमि में नमी बनी रहे।

सरसों की उन्नत किस्में

पूसा बोल्ड: यह किस्म 110-140 दिनों में पक जाती है जो 2000-2500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।

पूसा जयकिसान (बायो 902): यह किस्म 155-135 दिनों में पक जाती है जो 2500-3500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।

क्रान्ति: सरसों की यह किस्म 125-135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है जो 1100-2135 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।

आर एच 30: यह किस्म 130-135 दिनों में पकती है जो 1600-2200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।
आर एल एम 619: यह किस्म 140-145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है जो 1340-1900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक की उपज देती है।

पूसा विजय: यह किस्म 135-154 दिनों में पकती है और 1890-2715 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।

पूसा मस्टर्ड 21: सरसों की यह किस्म 137-152 दिनों में पककर तैयार होती है जो 1800-2100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज देती है।

पूसा मस्टर्ड 22: यह किस्म 138-148 दिनों में पककर तैयार हो जाती है जिसकी उपज क्षमता 1674-2528 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की है।

बीज उपचार कैसे करें
सरसों की भरपूर पैदावार हेतु फसल को बीज जनित बीमारियों से बचाने के लिये बीजोपचार आवश्यक है। मिटटी जनित एवं बीज जनित रोगो से बचाव हेतु कार्बेन्डाजिम-12 + मैंकोजेब-63 (कपेनी) 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज या थायोफिनेट मिथाइल (हेक्सास्टोप) 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार करें। फसल की प्राम्भिक अवस्था में रस चूसक कीटों से बचाव के लिए थायोमेथाक्साम (आॅप्ट्रा एफ-एस) 8 मिली प्रति किलो बीज से उपचारित करें।

जैव उर्वरक का उपयोग कैसे करें
पी.एस.बी.(स्फुर घोलक) 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बोने से कुछ घंटे पूर्व टीकाकरण करें। पी.एस.बी. 2.50 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से खेत में मिलाने से स्फुर को घुलनशील अवस्था में परिवर्तित कर पौधों को उपलब्ध कराने में सहायक होता है।

बुवाई और विधि
उचित समय पर बुवाई से उत्पादन तो अधिक होता ही है, साथ ही साथ फसल पर रोग व कीटों का प्रकोप भी कम होता है। इसके कारण पौध संरक्षण पर आने वाली लागत से भी बचा जा सकता है।

बुवाई का समय: सरसों की फसल को बारानी क्षेत्र में 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर के बीच 5-6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बोना चाहिए।

बुवाई की विधि: बुवाई देशी हल या सरिता या सीड़ ड्रिल से कतारों में करें। इसके अलावा, पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें और पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेंटीमीटर रखें। बीज को 2-3 सेंटीमीटर से अधिक गहरा न बोयें, अधिक गहरा बोने पर बीज के अंकुरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

सरसों की खेती की खुटाई
सरसों की खुटाई (टॉपिंग): जब सरसों करीब 30-35 दिन की व फूल आने की प्रारंभिक अवस्था पर हो, तो सरसों के पौधों को पतली लकड़ी से मुख्य तने की ऊपर से तुड़ाई कर देना चाहिए। इस प्रक्रिया को करने से मुख्य तना की वृद्धि रूक जाती है तथा शाखाओं की संख्या में वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप उपज में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है।

सरसों की खेती की सिंचाई
सिंचाई: उचित समय पर सिंचाई करने से उत्पादन में 25-50 प्रतिशत तक वृद्धि पाई गई है. इस फसल में 1-2 सिंचाई करने से लाभ होता है। सरसों की बोनी बिना पलेवा दिये की गई हो, तो पहली सिंचाई बुवाई के 30-35 दिन पर करें। इसके बाद अगर मौसम शुष्क रहे अर्थात पानी ना बरसे तो बोनी के 60-70 दिन की अवस्था पर फूल आने पर फैनटैक् प्लस 100 मि.ली को पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।


janwani address 220

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज है ‘सूबेदार’

अस्सी-नब्बे के दशक में बॉलीवुड में अन्याय और भ्रष्ट...

यूं ही नहीं हैं शाहरुख खान ‘किंग’

रजनीकांत स्टारर फिल्म 'जेलर' (2023) को बहुत पसंद किया...

बिहार, बिहार ही रहेगा रेल तो संभालो

जब रेल पटरी से उतरने लगे तो चिंता होना...

जंगल सिर्फ पेड़ नहीं एक जीवित तंत्र है

वृक्षारोपण और प्राकृतिक वन के बीच पारिस्थितिक अंतर को...

अपने-अपने ‘एपस्टीन

इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’...
spot_imgspot_img