- कभी भी चल सकता है फाइलों पर रेड पेन, फाइलें ली कब्जे में
- सीएसी की कारगुजारियों का खामियां भुगतेंगे भारी भरकम खर्चा करने वाले संपत्ति स्वामी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट ऐक्ट को ताक पर रखकर किए गए 100 से ज्यादा मुटेशन की फाइलों पर रेड पेन कभी भी चल सकता है। ऐसे मुटेशन की तमाम फाइलें कब्जे में ले ली गयी हैं। सीएसी की कारगुजारियों का खामियाजा उन संपत्तियों के मालिकों को भुगतना होगा जिन्होंने भारी भरकम रकम भी मुटेशन के नाम पर खर्च कर दी और अब मुटेशन के कैंसिल होने की बात कही जा रही है।
कैंट बोर्ड की सिविल एरिया कमेटी की विश्वसनियता खतरे में पड़ गयी है। पिछले कुछ समय के दौरान लिए गए फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। 100 से ज्यादा ऐसे फैसले बताए जा रहे हैं जिन पर जांच की तलावार लटक रही है। कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष के तख्ता पलट के बाद हुई सिविल एरिया कमेटी की बैठकों में 100 से ज्यादा संपत्तियों के मुटेशन जांच के दायरे में हैं।
आरोप है कि कैंट ऐक्ट का गंभीर उल्लंघन कर मुटेशन कर दिए गए। ऐसे मामले बड़ी संख्या में हैं जिनका मुटेशन किया ही नहीं जा सकता था, लेकिन फिर भी सिविल एरिया कमेटी ने ऐसा किया। इतना ही नहीं तत्कालीन सीईओ की मदद से बोर्ड से सीएसी के निर्णय का अनुमोदन भी करा लिया, लेकिन कारगुजारियों की जानकारी जब सामने आयी और फाइलों को खंगलना शुरू किया तो गंभीर चूक या कहें कैंट ऐक्ट के सीरियर वॉयलेंस के तमाम केस सामने आते चले गए।
जानकारों की मानें तमाम ऐसे मामलों को मुटेशन कर दिया गया। जिनमें चेज आॅफ परपज व सब डिविजन आॅफ साइट जैसी कैंट धाराओं उल्लंघन है। वहीं, दूसरी ओर यह भी जानकारी मिली है कि जिन संपत्तियों का मालिकाना हक तक नहीं है सीएसी ने आंख बंद कर उन पर भी स्वीकृति ही नहीं दी बल्कि बोर्ड की मोहर भी लगवा दी।
ये मामले जब पकड़ में आए गए और इनसे जुड़ी फाइलें तलब कर ली गयी तब बोर्ड के सदस्यों और सीएसी में हड़कंप मचा। इससे जुड़ी तमाम फाइलें सीईओ कक्ष में रखवा लिए जाने से सबसे ज्यादा बेचैन वो सदस्य हैं जिन्होंने सीएसी में बैठकर इनको ओके किया या फिर वो सदस्य हैं। जिन्होंने ऐसे मामलों की पैरवी की, लेकिन साफ सुथरी छवि वाले सीईओ नवेन्द्र नाथ के कड़क रवैये के चलते बोर्ड का कोई भी सदस्य इस मामले में मुंह खोलते हुए हिचक रहा है।
मुटेशन के अलावा और बहुत से ऐसे मामले सीईओ के पकड़ में आए हैं जो नियमानुसार नहीं किए जाने चाहिए थे, लेकिन किए गए हैं। इन दिनों सीईओ ने कैंट बोर्ड ने ऐसे ही फैसलों की धुलाई का अभियान चलाया हुआ है। वहीं, दूसरी ओर यह भी आशंका जतायी जा रही है कि सीएसी के जिन मुटेशनों पर बोर्ड प्रशासन यूटर्न लेता है। मसलन मुटेशन निरस्त किए जाते हैं, ऐसे मामलों में संपत्ति स्वामी पर दोहरी मार पड़नी तय है। जो खर्च किया है वो भी वापस मिलने वाला नहीं।

