मुलाकात में बाधा बनने पर करा दी गयी थी बंदीरक्षक की हत्या
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर जिला कारागार अपराधियों की शरणस्थली रही है और इस कारागार से अपराधी बेखौफ होकर अपना गैंग संचालित करते थे। इस जिला कारागार में अपराधियों को सभी सुविधाएं मुहैया रहती थी, यदि कोई जेल कर्मचारी अपराधियों के किसी कार्य में बाधा बनने का प्रयास करता था, तो उसे खामियाजा भुगतना पड़ता था।
अपराधियों का खौफ जेल कर्मचारियों पर तारी रहता था। जेल में मुलाकात में बाधा बनने पर एक बंदी रक्षक की हत्या तक करा दी गयी थी, जिसके बाद उनमें खौफ और ज्यादा बढ़ गया था।
13 दिसम्बर 2014 को जिला कारागाद में तैनात बंदी रक्षक चुन्नीलाल जब अपनी ड्यूटी समाप्त कर जेल के गेट पर पहुंचे थे, तो उन पर अंधाधुंध फायरिंग की गयी थी, जिसके चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गयी थी। मौके से पिस्टल के तीन खोखे बरामद किए गए थे।
अंधेरी गली होने के कारण लोगों ने हत्यारों को देखने की बात से इंकार कर दिया था। इस हत्याकांड के तार जिला कारागार से ही जुड़े हुए थे। पुलिस ने जब इस हत्याकांड का खुलासा किया था, तो इसमें जिला कारागार में बंद गेंगस्टर विक्की त्यागी का नाम सामने आया था।
जांच में खुलासा हुआ था कि जेल में मिलाई करने आये युवकों को चुन्नीलाल द्वारा रोक दिया गया था, जिससे खफा युवकों ने जेल गेट पर ही चुन्नीलाल को देखने की धमकी दी थी। हालांकि बाद में पुलिस ने विक्की त्यागी को इस मामले में मुल्जिम बनाया था। चुन्नीलाल की हत्या के बाद जेल में बदमाशों का खौफ तारी हो गया था।
जिला कारागार के जैमर बेसर, मोबाइलों पर होती है बात
एक ओर जहां शासन की मंशा है कि जेल से किसी भी तरह का कोई अपराध संचालित नहीं होने पाये, जिसके लिए टाॅप टेन अपराधियों की मुलाकात पर अंकुश लगाते हुए उनकी मुलाकात एलआईयू व कैमरों की निगरानी में कराये जाने के आदेश पारित किये गये हैं, वहीं दूसरी ओर जिला कारागार में चल रहे मोबाइलों के नेटवर्क धड़ल्ले से चल रहे हैं और अपराधी जमकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि सरकार ने इन नेटवर्क को रोकने के लिए मोटा पैसे खर्च कर जैमर लगाये गये थे, परन्तु यह जेमर केवल सफेद हाथी ही साबित हुए हैं। बडे़े-बड़े जैमर लगने होने के बाद भी अपराधी जेल से मोबाइल फोन इस्तेमाल कर पा रहे हैं।