- चुनावी सीजन में खादी के कारोबार में आया 25 फीसदी का उछाल
- अब भी फुल टेंÑड में है खादी, बड़ों से लेकर युवाओं तक में बाकी है क्रेज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जंग-ए-आजादी से लेकर राजनीति की पहचान बनी खादी के दिन वैसे तो अब लद से गए थे लेकिन इस चुनावी बेला में इसे फिर से संजीवनी मिलती दिख रही है। चुनावों के दौरान खादी का नया लुक लोगों विशेषकर युवाओं को खूब भा रहा है। खादी के बने कुर्तों से लेकर नेहरु कट जैकेट्स की बहार है। हाल ही में ईद के त्योहार पर ही खादी कुर्तों की भारी मांग रही। इसके अलावा फिलहाल चुनावी सीजन में खादी जैकेट्स (नेहरु कट) की भी काफी डिमांड है। जिस जैकेट को प. जवाहर लाल नेहरू और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष पहचान दी वही जैकेट अब युवाओ ंको खूब भा रही है।
यदि खादी व्यापारियों और इस प्रकार की जैकेट्स सीने वाले दर्जियों के डिमांड आंकड़ों पर यकीन करें तो ईद एवं इस चुनावी सीजन में नेहरु कट जैकेट्स की मांग में 25 फीसदी तक इजाफा हुआ है। खैरनगर के मो. ताहिर, जैदी फॉर्म (मंजूर नगर) के मो. असलम व लालकुर्ती के दानिश खान पिछले लगभग 20 से विभिन्न प्रकार की जैकेट्स बनाते आ रहे हैं। मो. ताहिर और दानिश खान बताते हैं कि 2014 में जब मोदी सरकार पहली बार केन्द्र की सत्ता में आई तब तो नेहरु कट जैकेट की ऐसी बहार आई थी कि उनके कारोबारी टर्नओरवर में ही कई गुना इजाफा हाहे गया था।

वहीं मो. असलम बताते हैं कि इस बार भी ईद एवं इस चुनावी सीजन में खादी की नेहरु कट जैकेट्स की काफ डिमांड आ रही है। वो बताते हैं कि उन्होंने एक्स्ट्रा लेबर लगाकर खादी की जैकेट्स तैयार करवाई हैं। मो. असलम के बड़े भाई मो. आदिल का भी खादी के कपड़ों का कारोबार है। वो बताते हैं कि खादी के जैकेट्स के अलावा खादी के कुर्तों से लेकर शर्ट्स तक की खासी डिमांड आ रही है। बकौल असलम खादी की शटर््स कॉम्बो पैक में भी मिल रही हैं, जो लगभग 400 रुपए की रेंज में हैं। नेहरु कट खादी जैकेट्स के औसत दाम 500 रुपए है।

