जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस भारत को कच्चे तेल पर और अधिक रियायतें देने जा रहा है, जिससे भारत को न सिर्फ आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा भी और मजबूत होगी। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई को लेकर बातचीत भी तेज हो गई है। यह साझेदारी ऐसे वक्त में हो रही है, जब अमेरिका रूस से भारत की नजदीकियों पर नाराजगी जता रहा है।
रूस से सस्ते तेल की बड़ी डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस भारत को यूराल क्रूड की कीमत में पहले से कहीं ज़्यादा छूट देने को तैयार है। यह छूट अब ब्रेंट क्रूड से 3-4 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो सकती है, जबकि जुलाई में यह अंतर सिर्फ 1 डॉलर था। इससे भारत को हर महीने करोड़ों डॉलर की बचत हो सकती है।
सितंबर में रूस से भारत की तेल खरीद अगस्त के मुकाबले 10-20% तक बढ़ी है। माना जा रहा है कि भारत ने 1.5 लाख से 3 लाख बैरल प्रति दिन की अतिरिक्त खरीद की है, और नई छूट के साथ यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। इससे यह साफ है कि भारत अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज़ करते हुए अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत की हवाई सुरक्षा होगी और मज़बूत
सिर्फ आर्थिक ही नहीं, सामरिक मोर्चे पर भी भारत और रूस की साझेदारी नई ऊंचाइयों को छू रही है। एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सप्लाई को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। साल 2018 की 5.5 अरब डॉलर की डील के तहत भारत को पांच सिस्टम मिलने हैं, जिनमें से तीन मिल चुके हैं। बाकी दो की डिलीवरी 2026-27 तक होने की संभावना है।
रूसी रक्षा अधिकारी दिमित्री सुगायेव ने पुष्टि की है कि भारत और रूस के बीच एस-400 की सप्लाई को और बढ़ाने पर बातचीत जारी है। इस सिस्टम की ताकत “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान सामने आ चुकी है, जब पाकिस्तान के लड़ाकू विमान भारत की वायुसीमा में घुसने से डर गए थे। एस-400 की मौजूदगी ने भारतीय एयर डिफेंस को लगभग अभेद्य बना दिया है।
क्या अमेरिका के लिए बढ़ रही है चुनौती?
अमेरिका, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में, रूस से भारत के घनिष्ठ संबंधों को लेकर नाखुश है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जिसमें से 25% का सीधा संबंध रूस से तेल खरीद से था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष आर्थिक समर्थन मिल रहा है।
इसके बावजूद भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र है और आर्थिक-सुरक्षा हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। रूस से सस्ते तेल की खरीद और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की सप्लाई इस बात का प्रमाण है।
भारत के लिए दोहरी जीत
रूस के साथ यह बढ़ती साझेदारी भारत के लिए दोहरी मजबूती लेकर आई है—एक तरफ सस्ते तेल से आर्थिक राहत, दूसरी ओर एस-400 जैसे हाई-टेक हथियारों से सैन्य ताकत में इजाफा। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, भारत की यह रणनीति उसे न केवल वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है, बल्कि इसके दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को भी साध रही है।

