
सर्वोच्च न्यायालय ने नफरती भाषण देने वाले तुच्छ तत्वों पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि जिस समय राजनीति और धर्म अलग हो जाएंगे एवं नेता राजनीति में धर्म का उपयोग बंद कर देंगे, उस समय नफरत फैलाने वाले भाषण भी समाप्त हो जाएंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं के भाषणों का उदाहरण देते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इन नेताओं के भाषण सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में विफल रहने को लेकर विभिन्न राज्य प्राधिकरण के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।