रामबोल तोमर |
मेरठ: तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है, जो बच्चों को प्रभावित करेगी। क्या क्रांतिधरा ने तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार हैं? लाला लाजपत राय मेडिकल हॉस्पिटल में बाल शिशु वार्ड भी हैं, लेकिन इससे निपटने के लिए फिलहाल मात्र 70 बेड अतिरिक्त बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा हैं। यह व्यवस्था सिर्फ मेडिकल में हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में न डॉक्टर हैं…न इंतजाम।
बच्चों में रोग फैला तो सिस्टम का वैसे ही दम फूल जाएगा, जैसे दूसरी लहर में फूला है। जनपद में आठ सीएचसी है, जिसमें तीस बेड नाम के लिए है, लेकिन भर्ती वहां पर एक भी मरीज नहीं किये जाते हैं। उनको रेफर मेरठ ही किया जाता है। क्योंकि सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों की टीम ही तैनात नहीं है तो फिर कैसे निपटेंगे तीसरी लहर से, यह बड़ा सवाल है।
यदि अब भी सिस्टम नहीं संभला तो फिर कैसे संभल पाएगा? सीएचसी मवाना की ही हम बात करें तो वहां पर 30 बेड हैं, लेकिन फिलहाल 10 बेड कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित कर रखे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ के नाम पर सिर्फ एक डॉक्टर है, लेकिन सीएचसी में गांव 47 पड़ते हैं।
क्या अकेले डॉक्टर तीसरी लहर से निपटने की क्षमता रखते हैं? यह संभव नहीं है। कम से कम तीन एमडी स्तर के बाल रोग विशेषज्ञ मवाना सीएचसी पर होने चाहिए तथा उनके नीचे जूनियर डॉक्टर की तैनाती हो, तभी तीसरी लहर से निपटने की बात कही जा सकती है।
मवाना को कोविड सेंटर तो बना रखा है, लेकिन गद्दे पुराने हैं। एसी भी नहीं लगे हैं। सफाई कर्मचारी तक सीएचसी के पास नहीं है। प्रतिदिन जो कचरा निकलता है, वह भी कई दिनों तक पड़ा रहता है, जो लोगों को संक्रमित भी कर सकता है।
सीएचसी प्रभारी नगर पालिका परिषद ईओ की खुशामद करते हैं, तब जाकर यह मेडिकल वेस्ट उठता है। डॉक्टर कम हैं, स्टाफ भी कम है। नवीन तैनाती स्टाफ की नहीं की जा रही है। फिर कैसे संभलेंगे हालात, यह सोचकर सीएचसी के डॉक्टर भी परेशान है कि आखिर तीसरी लहर आ गई तो हालात दूसरी तरह से भयावह हो सकते हैं। आयुष से भी तैनाती नहीं की जा रही है।
यह हालत मवाना सीएचसी तो एक मात्र उदाहरण है, यहां सरधना सीएचसी ले लिजिए, वहां भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्टाफ की भी भारी कमी हैं। यहां भी सीएचसी के क्षेत्र में करीब 40 गांव आते हैं। दूसरी लहर में सर्वाधिक सरधना क्षेत्र के गांव प्रभावित हुए हैं।
अब तीसरी लहर की बात की जा रही हैं, जिससे निपटने के लिए यहां कोई तैयारी नहीं है। एमडी स्तर के कम से कम तीन डॉक्टर यहां भी तैनात होने चाहिए, लेकिन एक भी नहीं है। सररुपुर खुर्द, रोहटा, फलावदा, किठौर, खरखौदा, पांचली खुर्द, भूडबराल व दौराला सीएचसी पर भी डॉक्टरों की तैनाती का यहीं हाल है। वहां भी पर्याप्त मात्रा में स्टाफ नहीं हैं।
ऐसे में सिस्टम हालात बिगड़ने के बाद कैसे निपटा जा सकता हैं। इससे पहले ही प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग मिलकर तैयारी क्यों नहीं कर रहे हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा परेशानी गांव के बच्चों को होगी, क्योंकि गांव के लोगों को दूसरी लहर में भी बेड नहीं मिले और तीसरी लहर का भयावह हुई तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
ठीक है प्रशासन ने आॅक्सीजन सर-प्लस कर ली हैं, लेकिन बेड, डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती होना भी आवश्यक हैं। समय रहते इसके लिए सिस्टम को तैयारी करनी चाहिए। क्योंकि बड़ों ने तो दूसरी लहर का मुकाबला कर लिया, लेकिन बच्चे कैसे कर पाएंगे। यह बड़ा सवाल है।
मुख्यमंत्री अरोग्य मेले में नहीं जाते थे एक्सपर्ट
एक हकीकत हम आपसे साझा कर रहे है कि मुख्यमंत्री अरोग्य मेला सीएचसी पर प्रत्येक संडे को लगाया जाता था, जिसमें तमाम मरीजों को उपचार दिया जाता था। मुख्यमंत्री अरोग्य मेले में मेडिकल के एक्सपर्ट डॉक्टरों की भी ड्यूटी आॅन रिकॉर्ड लगाई जाती थी, लेकिन एक भी डॉक्टर मुख्यमंत्री अरोग्य मेले में नहीं जाता था। यह सरकारी दस्तावेज मौजूद है।
बार-बार चिठ्ठी भी लिखी जाती थी, लेकिन मेडिकल से एक्सपर्ट की टीम नहीं जाती थी। यह हाल तो मुख्यमंत्री अरोग्य मेले का था। अब तीसरी लहर की बात की जा रही है, इसमें लापरवाही हुई तो मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन होगा? हालांकि फिलहाल मुख्यमंत्री अरोग्य मेले पर रोक लगी है।
क्योंकि कोरोना संक्रमण फैला हुआ है। जानकारी मिली है कि राजस्थान में मासूम बच्चे कोरोना संक्रमित मिले हैं, जिनको उपचार दिया जा रहा है। यदि ऐसे हालात मेरठ में बने तो उससे निपटने के लिए सिस्टम को पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए।

