Wednesday, April 1, 2026
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मात्र चार पर एनओसी, बाकी सभी 41 स्विमिंग पूल अवैध

  • जिले में चल रहे 45 स्विमिंग पूल, जिला क्रीड़ाधिकारी कार्यालय से जारी हुए मात्र चार एनओसी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गर्मियों का मौसम आते ही पूरे जिले में स्विमिंग पूल चलाने का धंधा शुरू हो जाता है, लेकिन इनके संचालन के लिए जिन मानकों का पालन करना चाहिए, वह नहीं होते हैं। इसीलिए लोगों की जान जा रही हैं। इस समय भी जिले में 45 स्विमिंग पूल चल रहे हैं। जबकि जिला क्रीड़ाधिकारी कार्यालय से महज चार के लिए एनओसी जारी हुई है। बाकी बचे सभी स्विमिंग पूल अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। शानिवार को जिला क्रीड़ाधिकारी द्वारा पत्र जारी कर अवैध स्विमिंग पूल संचालकों को चेतावनी दी है कि वह बिना एनओसी के स्विमिंग पूलों का संचानल न करें।

स्विमिंग पूल चलाने से पहले क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी कार्यालय से जारी एनओसी लेना अनिवार्य है, लेकिन एनओसी के लिए जरूरी मानकों को पूरा करना जरूरी है। जबकि जिले में संचालित 45 स्विमिंग पूलों में से केवल चार पूल ही एनओसी लेकर चलाए जा रहे हैं। मानकों की पूर्ति न होने के कारण ही लोगों की पूल में जान जा रही हैं। जिले में अब तक दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पहली फैंटेंसी वाटर पार्क जिसमें मोदीनगर में रहने वाले बैंक मैनेजर मोहित की नहाते समय गर्दन की हड्डी टूट गई थी, लेकिन पूल में उपचार व लाइफ गार्ड की व्यवस्था नहीं होने के कारण सही समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई थी।

दूसरी घटना शुक्रवार की है, जिसमें 17 वर्ष के समीर निवासी सिवालखास की नहाते समय पूल के बाहर मौत हो गई। इसमें भी समय पर इलाज मिलना मौत की वजह बताया जा रहा है। पूल में जिन जरूरी मानकों को पूरा करना होता है। उनमें सबसे अहम है, स्विमिंग पूल की जितनी लंबाई और गहराई कागजों में है, वह उतनी ही है, पूल में सेफ्टी गार्ड होने जरूरी है, बड़ा बांस जिससे किसी डूबते को बचाया जा सके, लाइफ गार्ड के रूप में जरूरी उपकरण, गोताखोर, आसपास किसी सरकारी या निजी अस्पताल का होना जरूरी है। साथ ही एक एमबीबीएस डाक्टर को भी पूल चलाने के समय तक मौके पर रहना चाहिए और बच्चों व बड़ों के लिए तय गहराई होनी चाहिए।

इसके साथ ही सबसे जरूरी है कि पूल का रजिस्ट्रेशन जिसकी फीस 15 हजार रुपये सालाना है, जिसके बिना एनओसी जारी नही हो सकती, लेकिन महज चार स्विमिंग पूल संचालकों ने ही यह एनओसी ले रखी है जिसको लेकर अब प्रशासन सख्ती करने जा रहा है। शनिवार को प्रांतीय क्रीड़ाधिकारी योगेन्द्र पाल व जिलाधिकारी के बीच बैठक हुई। जिसमें अवैध रूप से चल रहे स्विमिंग पूलों पर नकेल कसने की तैयारी की गई।

स्विमिंग पूल संचालकों को 27 जून तक का समय दिया गया है जिससे वह पूल संचालन के सभी मानक पूरे कर सकेंऔर एनओसी प्राप्त कर सके। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट, सभी अपर नगर मजिस्ट्रेट व सभी एसडीएम अपने क्षेत्र में चल रहे स्विमिंग पूलों की जांच करेंगे। जिन पूल संचालकों के पास एनओसी नहीं होगी उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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