रोज हजारों गरीब लौट रहे हैं मेडिकल और जिला अस्पताल से
कोरोना के अलावा अन्य सीजनल बीमारियां कर रही हमला
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना की अभी देश में कोई दवा या वैक्सीन नहीं है, लेकिन पूरा स्वास्थ्य तंत्र इसी के इर्दगिर्द परिक्रमा करता नजर जा रहा है, इसके उलट जिन बीमारियों की खासतौर से वर्तमान सीजन में होने वाली दवाएं मौजूद हैं कम से कम उन्हीं बीमारियों से मरीजों को बचा लिया जाए, लेकिन ओपीडी पर ताले के सरकारी फरमान के नाम पर उन गरीबों को उनके हाल पर छोड़ दिया है जो सरकारी या फिर खैराती अस्पताल में दो से पांच रुपए का पर्चा बनवा कर इलाज कराते रहे हैं।
सरकारी व खैराती अस्पताल में बीमारी की मुफ्त मिलने वाली दवा के इंतजार में चार चार घंटे तक लाइन में लग कर इंतजार भी कर लेते थे, लेकिन ओपीडी पर सरकार की रोक के बाद ऐसे गरीब तबके के मरीज बेहाल हैं। उनके पास इलाज का कोई दूसरा साधन नहीं। इतना पैसा नहीं कि प्राइवेट डाक्टर से इलाज करा सकें।
जानलेवा है बीमारियों का सीजन
सरकारी और प्राइवेट दोनों ही चिकित्सकों का कहना है कि वर्तमान सीजन बीमारियों की लिहाज से सबसे ज्यादा जानलेवा है।
इन दिनों सबसे ज्यादा रोगी डेंगू, मलेरिया, चिकन गुनिया, ज्वाइंडिस, मियादी बुखार, वाटर एंड फूड फैक्टर डिजीज व चर्म रोड के होते हैं। इसके अलावा यदि सर्दी की चपेट में रोगी आ जाए तो स्वाइन फ्लू के वायरस की भी चपेट में आ सकते हैं।
लौट रहे हजारों मरीज प्रतिदिन
ओपीडी पर फिलहाल रोक के आदेश की वजह से मेडिकल और जिला अस्पताल से प्रति दिन हजारों की संख्या में मरीज निराश लौट रहे हैं।
हालांकि मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि टेली मेडिसीन सेवा चालू की है। इसी तर्ज पर जिला अस्पताल के सीएमएस डा. हीरा सिंह बताते हैं कि उन्होंने मरीजों की सुविधा के लिए टेलीमेडिसीन सेवाएं शुरू की हैं। इसके अलावा जो मरीज आ जाते हैं उन्हें भी ओपीडी में बैठने वाले डाक्टर अटेंड कर रहे हैं।
झोलाछाप की चांदी ही चांदी !
बीमारी के सीजन में इन दिनों झोलाछाप डाक्टरों की चांदी है। गली मोहल्लों तथा तथा गांव देहात के दूर दराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की लाश कंधों पर ढोह रहे झोलाछाप ही ओपीडी बंद होने की दशा में गरीब मरीजों का एक मात्र सहारा रह गए हैं।
हालांकि ओपीडी बंद होने का सबसे ज्यादा लाभ भी ऐसे ही झोलाछाप को मिल रहा है। जो पूरे दिन एक मरीज के लिए तरसते थे उनके यहां इन दिनों मरीजों की अच्छी खासी भीड़ देखी जा सकती है।
ये कहना है आईएमए सचिव का
इंडियन मेडिकल काउंसिल के सचिव डा. अनिल नौसरान का कहना है कि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों की ओपीडी की बहुत जरूरत है। इन दिनों बीमारियों का पीक आवर चल रहा है। ऐसे में ओपीडी होना बेहद जरूरी है। कोरोना संक्रमण से लड़ाई के चक्कर में बाकी मरीजों की अनदेखी घातक है। कोरोना की अभी वैक्सीन नहीं है, लेकिन जिन बीमारियों की दवाएं हैं उन मरीजों को बचाने का काम तो किया जाना चाहिए। बाकि मरीजों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता।
ये बोले जिला अस्पताल के सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. हीरा सिंह ने बताया कि टेली मेडिसीन के जरिये सेवाएं दी जा रही हैं। अब भी प्रति दिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सभी को इलाज दिया जा रहा है। कोई भी मरीज ऐसा नहीं जिसको लौटाया जाए।
ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि उनके यहां इमरजैंसी सेवाओं के अलावा कुछ ओपीडी भी चल रही हैं। लेकिन सरकार की ओर से मेडिकल को बड़ी जिम्मेदारी कोरोना मरीजों की दी गयी है। शासन की मंशानुसार काम किया जा रहा है।

