Tuesday, November 30, 2021
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeUttarakhand NewsDehradunगैरसैण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी, बनेंगी समानांतर व्यवस्थाएं: सीएम त्रिवेंद्र

गैरसैण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी, बनेंगी समानांतर व्यवस्थाएं: सीएम त्रिवेंद्र

- Advertisement -

जनवाणी ब्यूरो |

देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गैरसैंण (भराड़ीसैंण) प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी और देहरादून राजधानी है। गैरसैंण को राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए वहां समानांतर व्यवस्थाएं की जाएंगी। राज्य सरकार और निजी क्षेत्र की सहभागिता से गैरसैंण में 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। मुख्यमंत्री ने यह बात स्थायी राजधानी को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही।

बुधवार को सीएम आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी के अनुरूप गैरसैंण में हमें समानांतर व्यवस्थाएं करनी हैं। इस दृष्टि से आगामी 10 वर्षों में गैरसैंण में विभिन्न अवस्थापना सुविधाओं के विकास की योजना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तो निवेश करेगी ही साथ-साथ निजी निवेश भी आएगा। गैरसैंण क्षेत्र की तमाम अवस्थापना सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, बिजली, सीवरेज आदि की तमाम व्यवस्थाएं की जानी हैं। गैरसैंण में अच्छे विद्यालय, खेल मैदान मनोरंजन के तमाम संसाधनों के विकास आदि के लिए 25 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी को विकसित करने के लिए सबसे पहला काम पर्याप्त भूमि की व्यवस्था करना है। हमारी कोशिश राजधानी से बेहतर कनेक्टिविटी पर ध्यान देने की भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवालीखाल से भराड़ीसैंण तक डबल लेन सड़क का निर्माण होगा। इसके लिए नौ करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। चार हेलीकाप्टरों के उतरने लायक हेलीपैड के निर्माण के लिए भी धनराशि उपलब्ध कराई गई है। उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में उठे विवाद, बजट खर्च में हुई अनियमितता पर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि बोर्ड का स्पेशल ऑडिट हो रहा है। स्पेशल ऑडिट के बाद पूरी असल तस्वीर सामने आ जाएगी। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बुधवार को सीएम आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ऑडिट एक नियमित प्रक्रिया है। नियमित रूप से ऑडिट होना चाहिए था।

अब स्पेशल ऑडिट हो रहा है। तो उसके बाद सभी चीजें सामने आ जाएंगे। कर्मकार कल्याण बोर्ड का स्पेशल तो दूर सामान्य ऑडिट तक 2017 से नहीं हुआ है। जबकि 2017 से पहले नियमित रूप से बोर्ड के हर खर्च का ऑडिट होता था। इसे बोर्ड के पटल पर भी रखा जाता था। नियमित रूप से बोर्ड बैठकें भी होती थी। 2017 से पहले न तो ऑडिट हुआ और न ही नियमित रूप से बोर्ड बैठकों का आयोजन।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img

Recent Comments