Tuesday, April 7, 2026
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Meerut News: अब रात्रि में पोस्टमार्टम एक हजार वॉट की कृत्रिम रोशनी में होगा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसी की भी मौत होने की वजह पता करने के लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। साथ ही ऐसे केस जिनमें मृतक के परिजन हत्या होने का दावा करते हैं और पुलिस केस बनता है तो भी पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है। इन केसों में शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाती है लेकिन इसका खर्च मृतक के परिजनों को वहन करना होता है, लेकिन अब योगी सरकार ने नई पोस्टमार्टम नीति लागू कर दी है जिसमें वीडियोग्राफी का खर्च सरकार द्वारा वहन करने की बात कही गई है।

जारी नई पोस्टमार्टम नीति में काफी बदलाव किए गए है जिसके बाद अब पोस्टमार्टम को और अधिक संवेदनशील व सुविधाजनक बनाया गया है। किसी परिवार पर उस समय क्या गुजरती है, जब उसका कोई अपना दुनिया से चला जाता है इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वहीं, जब मौत पुलिस मुठभेड़, पुलिस अभिरक्षा में, जेल में निरुद्ध होने के दौरान, आत्महत्या, डिकम्पोज्ड बॉडी मिलने पर, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधो जैसे दहेज हत्या व रेप के बाद हत्या के साथ ही विवाह के बाद प्रथम 10 वर्ष में किसी महिला की हुई मौत के मामलों में पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाता है। वहीं, ऐसे हादसों में मौत होना जिनमें सरकार द्वारा मुआवजे की घोषण की जाती है उनमें भी पोस्टमार्टम कराया जाता है। लेकिन कई बार पोस्टमार्टम में कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई इसके लिए शव-विच्छेदन की वीडियोग्राफी कराई जाती है। इस वीडियोग्राफी का खर्च अब रोगाी कल्याण समिति या 42 अन्य सरकारी मदों से वहन किया जाएगा। वहीं, पोस्टमार्टम के दौरान पीड़ित परिवार के बैठने की उचित व्यवस्था, वॉशरूम व पेयजल की उपलब्धता होना जरूरी होगा।

शव पोस्टमार्टम हाउस तक लाने-ले जाने की होगी व्यवस्था

नई पोस्टमार्टम नीति में साफ किया गया है कि यदि किसी की मौत राजकीय चिकित्सालय में होती है तो शव को पोस्टमार्टम हाऊस तक लाने- लेजाने के लिए दो शव वाहन उपलब्ध होने चाहिए। इनके द्वारा शव को नि:शुल्क एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाएगा। साथ ही यदि किसी ऐसे स्थान पर मौत हुई है जहां पुलिस को शव पोस्टमार्टम हाऊस तक भेजना पड़े तो इसकी व्यवस्था पुलिस को करनी होगी। महिला की संदिग्ध परिस्थिति में मौत पर यदि पोस्टमार्टम के लिए बोर्ड गठित होने पर पैनल में एक महिला डाक्टर को शामिल करना जरूरी है।

वहीं, यदि किसी की मौत पुलिस मुठभेड़, जेल में या पुलिस अभिरक्षा में होती है और उसका पोस्टमार्टम रात में कराना जरूरी हो तो ऐसे में पैनल में महिला डाक्टर का होना जरूरी नहीं है। नई व्यवस्था में शव-विच्छेदन प्रक्रिया में यदि कोई समस्या आती है तो उसके समाधान के लिए सभी जनपदों में शव-विच्छेदन सुधार समिति का गठन होगा जिसमें जिलाधिकारी अध्यक्ष, वरिष्ठ पुलिस अधिकक्षक या पुलिस अधिक्षक सदस्य और मुख्य चिकित्साधिकारी संयोजक सदस्य होंगे। नई पोस्टमार्टम नीति आई है, लेकिन अभी भी मेरठ में पोस्टमार्टम हाउस में एक्स-रे मशीन की कमी है। इसके लिए कई बार शासन को लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।

-डॉ. अशोक कटारिया, सीएमओ, मेरठ।

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