जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पण्डित ललित शर्मा के अनुसार शीतला माता के स्वरूप का प्रतीकात्मक अर्थ है, माता के वस्त्रों का लाल रंग सतर्कता को प्रतीक माना जाता है। उनके चारों भुजाओं में झाड़ू, कलश, सुप और कटोरा ये सफाई के प्रतीक चिह्न हैं।
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शीतला माता, पर्यावरण की शुद्धिकरण की देवी है जो सृष्टि को विषाणुओं से बचाने का संदेश देती हैं। शीतला माता के नाम से ही स्पष्ट होता है कि मां किसी भी समस्या से शीतल राहत देती हैं। यदि किसी व्यक्ति को त्वचा संबंधी रोग हो जाये तो उन्हें शीतला माता का पूजन करना चाहिए इससे बीमारी से जल्दी ही राहत मिलती है।
शीतला अष्टमी पूजा का शुृभ महूर्त 25 मार्च दिन शुक्रवार को प्रात: छह बजकर 20 मिनट से शाम छह बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
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