Tuesday, March 24, 2026
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एक साल का हुआ किसान आंदोलन, कुंडली बार्डर पर जश्न की तैयारी

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर जारी ऐतिहासिक किसान आंदोलन का शुक्रवार को एक साल पूरा हो रहा है।  पीएम की तरफ से तीनों कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद एसकेएम ने किसानों से दिल्ली बॉर्डर्स पर पहुंचने और आंशिक जीत उत्सव मनाने का आह्वान किया था। इस अपील का बृहस्पतिवार को अच्छा खासा असर देखने को मिला। हालात को देखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है।

आलम यह था कि कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर किसानों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से शुरू होकर देर रात तक जारी रहा। हर एक घंटे में 15 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कुंडली बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। कानून वापस लिए जाने की घोषणा से किसान जोश में हैं, लेकिन एमएसपी समेत लंबित मांगों को भी नहीं भूले हैं। उनकी सरकार से उम्मीद भरी अपील है कि बाकी मांगों को जल्द ही पूरा किया जाए, ताकि वह घर लौट सकें।

संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 26 नवंबर को  ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के साथ शुरू हुआ किसान आंदोलन शुक्रवार को अपने ऐतिहासिक संघर्ष का एक साल पूरा करेगा।

किसान आंदोलन के शुक्रवार को एक वर्ष पूरा होने पर व किसानों के 29 नवंबर को संसद कूच के एलान को देखते हुए दिल्ली के तीनों बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसर एक्शन मोड में आ गए हैं और बैठकों को दौर शुरू हो गया है।

दिल्ली पुलिस टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर पर फिर से लोहे की कीलें व बैरीकेड लगाकर सड़कों को बंद सकती है। सड़कों को बंद करने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। तीनों ही बॉर्डरों पर शुक्रवार से सुरक्षा सख्त हो जाएगी। दिल्ली पुलिस के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीनों ही बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दे दिए गए हैं।

टीकरी बॉर्डर पर बृहस्पतिवार रात 11 बजे संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी डीसीपी व थानाध्यक्ष रहेंगे।  शुक्रवार से जिले के सभी थानाध्यक्षों को सुरक्षा में लगा दिया गया है। सभी थानाध्यक्षों को सुरक्षा प्वाइंट बता दिए गए हैं। टिकरी बॉर्डर पर सुरक्षा के लिए बाहरी फोर्स की नौ कंपनियां तैनात की गई हैं। टिकरी बॉर्डर के अलावा घेवरा मोड़ व नांगलोई में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि किसानों के संसद कूच को देखते हुए रोहतक रोड को फिर से कीलें व बेरीकेड्स लगाकर बंद करने की तैयारी कर ली गई है। इस तरह सिंघु बॉर्डर पर भी सुरक्षा को बढ़ाया गया है। हालांकि अभी तक सिंघु बॉर्डर पर मार्ग को खोला नहीं गया है। वह पर भी बाहरी फोर्स की कंपनियां तैनात की गई हैं। सिंघु गांव से होकर गुजरने वाले रास्ते पर भी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी दिलाने की मांग केंद्र सरकार से की है। मोर्चा का कहना है कि एमएसपी कानून के लिए नई कमेटी बनाने की आवश्यकता नहीं है। यदि इसके बाद भी सरकार कमेटी बनाती है तो एक-दो प्रांत से नहीं, बल्कि हर प्रांत से किसान नेताओं को शामिल करना चाहिए। राष्ट्रीय किसान मोर्चा के संयोजक वीएम सिंह ने बृहस्पतिवार को महिला प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता की।

उन्होंने कहा कि देश के हर किसान की एमएसपी पर खरीद को गारंटी देने के लिए कानून बनाने की मांग पिछले 25 वर्षों से चली आ रही है। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश में एमएसपी पर खरीद का आंदोलन अक्तूबर में शुरू हुआ था। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता हट गए थे, जिनकी जगह पर राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया था। राजनाथ सिंह द्वारा एमएसपी पर खरीद की गारंटी का आश्वासन देने पर 250 किमी से अधिक चक्का जाम समाप्त हुआ था।

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