- खुलती नजर आ रही भ्रष्टाचार की पोल
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारत कालीन तीर्थ नगरी एक समय कौरव पांडवों के युद्ध के लिए चर्चित थी और आज भी चर्चित है तो हस्तिनापुर चांदपुर मार्ग को जोड़ने के लिए गंगा नदी पर बनाये गये पुल की एप्रोच रोड योजना के अधिकारियों के काले कारनामों के कारण। सालों से हस्तिनापुर में जमे अधिकारी के कारनामे से हर कोई वाकिफ है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता या उच्च अधिकारियों को भेंट पूजा के कारण कोई उनका कुछ बिगड़ नहीं पा रहा है।
योजना के नाम का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों ने अपनी तिजोरी में बेखौफ होकर बंद कर रहे हैं। विभाग के उच्चाधिकारियों का भौतिक सत्यापन और टेंडर के सभी लेन-देन का आॅडिट उच्चस्तरीय टीम से कराना चाहिए, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है। जिसके चलते सड़क निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की पोल खुलती नजर नहीं आ रही है।
पुल पर आवागमन शुरू करने के लिए पुल के दोनों तरफ लोक निर्माण विभाग द्वारा एप्रोच रोड का निर्माण भी शुरू किया गया। सड़कों में मापदंडों व नियम कायदों दरकिनार कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ने ठेकेदारों से मिलीभगत करके बेतहाशा मुनाफा कमा रहे हैं। सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही और निर्माण के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत ग्रामीणों ने की।

सड़क बनाने में घटिया निर्माण सामाग्री का उपयोग हुआ है, जो सड़क की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है। ठेकेदारों ने अधिकारियों से मिलीभगत करके सड़क के निर्माण में मापदंडों को ठेंगा दिखते हुए कार्य किय है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कमीशन की लालच ने अधिकारियों के आंख-कान बंद कर दिया है और ठेकेदार घटिया निर्माण कर निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा डकार रहे हैं।
मुख्य अधिकारी जो विगत 15 सालों से हस्तिनापुर क्षेत्र में पदस्थ होने की जानकारी है। सरकार आयी, लेकिन अधिकारी अपने जगह से टस से मस नहीं हुए। जिसका नतीजा करोड़ों की लागत से बनाई जाने वाली सड़क गंगा नदी के मामूली जलस्तर वृद्वि में ही धराशायी हो गई और अधिकारियों ने कार्रवाई के नाम पर फिर से लीपापोती कर दी।
भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार सालों से जमे अधिकारी
हस्तिनापुर चांदपुर की दूरी को कम करने के लिए गंगा पुल के दोनों और बनी एप्रोच रोड में लोक निर्माण विभाग के अंदर सालों से जब मैं अधिकारियों ने बड़े खेलकर दिए और उच्चाधिकारियों को भनक तक नहीं लगने दी। जहां एप्रोच रोड महज एक साल में बनकर तैयार होने थी। वहीं, रोड का कार्य पांच साल में भी पूरा नहीं हुआ। विभागीय सूत्रों की माने तो लोक निर्माण विभाग में कुछ अधिकारी सालों से एक ही पद पर कार्यरत है। कुछ का प्रमोशन के बाद ट्रांसफर हुआ, लेकिन एप्रोच रोड लगाओ लगातार बना रहा और वापस मेरठ जनपद में ही स्थानांतरण करा लिया। जिसके बाद एप्रोच रोड में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ।

