Friday, May 15, 2026
- Advertisement -

आईआईटी रुड़की-कानपुर की रिपोर्ट को भी पीडब्ल्यूडी का ठेंगा!

  • दोनों तकनीकी विश्वविद्यालयों ने पहले ही चेता दिया था
  • लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आईआईटी रुड़की और आईआईटी कानपुर। यह दोनों वो नाम हैं जिन्हें तकनीकी शिक्षा देने में महारत हासिल है। इन दोनों संस्थानों ने देश और विदेश को कई बेहतरीन इंजीनियर दिए हैं। कई बड़ी बड़ी संस्थाएं इनकी तकनीक का लोहा मानती हैं। इन सबके बावजूद लोक निर्माण विभाग इन दोनों विश्वविद्यालयों की रिपोर्ट को जरा भी एहमियत नहीं देता।
यह हम नहीं कह रहे बल्कि विभाग के ही कुछ इंजीनियरों की जुबानी है।

विभाग से जुड़े विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि अब से पूर्व आईआईटी रुड़की और कानपुर विवि तक की टीमें विभाग को इस पुल को लेकर किए जाने वाले सुरक्षात्मक पहलुओं के प्रति चेता चुकी थीं और बाकायदा इन विवि ने अपनी रिपोर्ट तक में यह कह दिया था कि पुल तभी सुरक्षित होगा जब पुल के गाइड बंध बनकर तैयार होंगे। हालांकि विभाग ने गाइड बंध का एस्टीमेट मुख्यालय को भेजा था, लेकिन अभी तक भी यह मुख्यालय में पेंडिंग पड़ा हुआ है।

07 5

हांलाकि विभाग के चीफ इंजीनियर यह दावा कर रहे हैं कि इसी वित्तीय वर्ष में इस पुल के लिए जो 129 करोड़ रुपये का एस्टीमेट भेजा गया है वो रिलीज हो जाएगा। दरअसल, हस्तिनापुर का गंगा पुल हादसा लोक निर्माण विभाग के गले की फांस बन चुका है, जिसे विभागीय अधिकारी उगले तो परेशानी, निगले तो परेशानी। आखिर करें भी तो क्या। दरअसल, एक कहावत है कि जो जैसा बोता है वैसा ही काटता है।

पीडब्ल्यूडी में भी कुछ यही कहानी चल रही है। पुल के लिए सेंक्शन मिलने से लेकर आज तक भी इसे गंगा पुल की बदनसीबी कहें या फिर उच्च विभागीय अधिकारियों का ढुलमुल रवैया कि 2008 से लेकर आज 14 साल में भी मात्र 850 मीटर के लगभग लम्बाई का यह पुल पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सबसे पहले सन 2008 में जब इस पुल का प्रस्ताव पास हुआ तब से लेकर 2015 तक इस पुल के निर्माण का काम चलता रहा।

हालांकि इस दौरान कई बार बीच में विभिन्न कारणों से पुल के निर्माण में बाधा आई और कई बार निर्माण रोकना पड़ा। बताया जाता है कि निर्माण कई बार वन विभाग की एनओसी न मिलने की वजह से भी रोका गया। सूत्रों के अनुसार फिर 2015 से 2018 तक निर्माण कार्य रुका रहा। जैसे-तैसे करके काम शुरू हुआ, लेकिन आज तक भी यह पुल पूरी तरह से नहीं बन पाया है।

एआडी की जानकारी में है पूरा मामला

पीडब्ल्यूडी के नवनियुक्त विभागाध्यक्ष संदीप कुमार की जानकारी में पूरा मामला है। संदीप कुमार कुछ समय पहले मेरठ में चीफ इंजीनियर रह चुके हैं। बाद में उनका तबादला हो गया था फिलहाल वो विभाग के एचओडी हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि वो इस मामले में जरा भी दिलचस्पी लें तो शासन को भेजे गए 129 करोड़ के प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति मिल सकती है।

अब भी न संभले तो बरसात में बह सकता है पूरा पुल

खुद पीडब्ल्यूडी विभाग के कुछ वरिष्ठ अभियंताओं ने तो यहां तक आशंका जता दी है कि यदि अब भी नहीं संभले तो अगली बरसात में हालत और भी खराब हो सकती है। एक अभियंता ने तो यहां तक आशंका जता दी है कि यदि पुल इसी स्थिति में रहेगा तो अगली बरसात में कहीं पूरा पुल ही न बह जाए।

42 करोड़ पर अटका है पूरा मामला!

इस पुल की मेंटीनेंस के लिए पूर्व में 87 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था और विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह पैसा 2016 में सेक्शन भी हो गया था, लेकिन बाद में महंगाई बढ़ने पर प्रस्ताव को पुन: रिवाइज कर 42 करोड़ की वृद्धि के साथ 129 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा गया, लेकिन यह अभी तक भी पेन्डिंग पड़ा हुआ है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Unnao Case: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका, आजीवन कारावास की सजा बरकार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म...
spot_imgspot_img