Sunday, April 12, 2026
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डफरिन में प्रसूताओं से बधाई के नाम पर खुली वसूली

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अगर बेटा पैदा हुआ तो आप अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार रहिए। बात चाहे सरकारी अस्पताल की हो या निजी नर्सिंग होमों की, बधाई के नाम पर जबरदस्ती पैसा लिया जा रहा है। यदि लोग अपनी मर्जी से कुछ देना चाहे तो नर्स और अन्य स्टाफ को मंजूर नहींं।

जिला महिला अस्पताल में लोग इस तरह के आतंक से परेशान हो चुके हैं। जिला महिला अस्पताल में सीजर डिलीवरी आॅपरेशन के लिए आने वाली प्रसूताओं से नर्स और कर्मचारी बेखौफ होकर पैसा ले रहे हैं। लड़के के जन्म लेने पर बधाई के नाम पर प्रसूताओं से पैसों की मांग की जाती है।

दूरदराज क्षेत्र से सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं के परिजनों से स्टाफ नर्स पैसा वसूलती है। वार्ड में ड्यूटी करने वाली कर्मचारी भी बधाई के नाम पर पैसे मांगती हैं। यदि पैसा न दिया जाए तो स्टाफ नर्स बच्चा दिखाने तक से मनाकर देती हैं। वहीं, मरीज को अस्पताल लाने वाली आशाओं से भी स्टाफ नर्स पैसों की मांग करती है।

जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मिलती है मदद

जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं से पैसे की मांग करना बिल्कुल गलत है। गर्भवती महिलाओं और नवजातों की स्थिति में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) की शुरुआत की है।

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इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला की डिलीवरी होने पर सीधे उनके बैंक अकाउंट में 6000 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना की शुरुआत 2005 में की गई थी। जेएसवाई में मदद के पैसे जच्चा-बच्चा को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने के हिसाब से दी जाती है।

जननी सुरक्षा योजना से सालाना एक करोड़ से अधिक महिलाओं को मदद मिल रही है। इस योजना का उद्देश्य गरीब गर्भवती महिलाओं के संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। जननी योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की सारी जांच एवं डिलीवरी नि:शुल्क की जाती है।

बिना पैसे लिए नहीं दिखाते बच्चा

तीमारदारों ने बताया कि स्टाफ नर्स बिना पसे लिए बच्चा तक नहींं देती हैं। स्टाफ नर्स कहती हैं बच्चा तभी दिखाउंगी जब पैसे दोगे। प्रसव के साथ-साथ सफाई के नाम पर भी कर्मचारी और स्टाफ नर्स पैसे वसूली करते हैं।

यदि अपनी मर्जी से कुछ कम पैसे दिए जाते हैं तो स्टाफ नर्स बच्चा दिखाने तक से मना कर देती हैं। तीमारदारों ने कहा कि अस्पताल में इस तरह अवैध वसूली पर रोक लगनी चाहिए। सरकारी अस्पताल में सब कुछ नि:शुल्क होता है। वहीं, डिलीवरी के लिए आशाएं जो भी मरीज अस्पताल में लाती हैं, उनसे भी स्टाफ नर्स पैसों की मांग करती हैं।

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प्रसव के बाद जांच कराने जिला महिला अस्पताल पहुंची अनुराधा ने बताया कि कुछ दिन पहले उनके बेटे का जन्म हुआ है। प्रसव के बाद बधाई के नाम पर दो हजार रुपये कर्मचारियों ने लिए। जबकि सरकारी अस्पताल में सब कुछ नि:शुल्क है। स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
-अनुराधा निवासी इंद्रापुरी

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डिलीवरी के लिए स्टाफ नर्स पैसे की मांग करते हैं। इसके बाद नवजात की सफाई के लिए भी पांच सौ रुपए वसूल लिए। यदि पैसा न दो तो भड़क जाते हैं। सरकारी अस्पताल में अधिकतर आर्थिक रुप से कमजोर लोग ही आते हैं। ऐसे में पैसों की मांग करना बिल्कुल गलत है।
-रूबीना, निवासी जली कोठी

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अस्पातल में पर्ची के बाद सभी व्यवस्था नि:शुल्क है। पैसा मांगने का मामला संज्ञान में नहीं है। अभी तक किसी महिला ने इस तरह की शिकायत नहीं की है। यदि इस तरह का व्यवहार अस्पताल के कर्मचारियों ने किया है, तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-डा. मनीषा अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल

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