Saturday, April 11, 2026
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मेरठ में आक्सीजन भरपूर, प्रतिदिन 1400 सिलेंडरों की आपूर्ति

  • 2800 आक्सीजन सिलेंडरों की है क्षमता

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में अब मरीजों और उनके तीमारदारों को आॅक्सीजन के लिये परेशान होने की जरूरत नहीं है। शहर में सभी प्लांटों पर भरपूर मात्रा में आॅक्सीजन उपलब्ध है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से बनाये गये केन्द्रों पर भी आॅक्सीजन वितरित की जा रही है। प्लांटों पर इस समय आॅक्सीजन अधिक है और सप्लाई कम है। इससे आॅक्सीजन की कमी होने के आसार नहीं है।

शहर में शुरूआत में मेडिकल आॅक्सीजन के लिये खूब मारा मारी रही। यहां लंबी-लंबी लाइनें लगने के बाद भी लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। जिसके बाद प्रशासन की ओर से तीन केन्द्र भी बनाये गये जहां आम लोगों को आॅक्सीजन वितरित की जा रही है।

प्लांटों पर भी अस्पतालों को आॅक्सीजन की खूब सप्लाई की जा रही है। वर्तमान स्थिति को देखे तो किसी भी प्लांट पर आॅक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है। जिससे मरीजों को भी घबराने की जरूरत नहीं है। बिजौली स्थित मेरठ मेडिआॅक्सी प्लांट पर भी क्षमता के अनुसार आॅक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने भी रविवार को मेरठ मेडिआॅक्सी प्लांट के संचालकों की सराहना की थी। प्लांट के डायरेक्टर सौरभ केन, सलोनी व अमित कि यहां प्लांट में मेडिकल आॅक्सीजन, मेडिकल नाइट्रोजन, कार्बन डाई आॅक्साइड, नाइट्रस आॅक्साइड, आर्गन व इंडस्ट्रियल कार्बन डाई आॅक्साइड का उत्पादन हो रहा है।

यहां से प्रतिदिन 1400 डी टाइप मेडिकल आॅक्सीजन सिलेंडर वितरित किये जा रहे हैं। क्षमता 2800 डी टाइप मेडिकल आॅक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन है। आॅक्सीजन निर्माण संयत्र क्षमता 20 टन प्रति दिन है। यहां सीएम ने भी प्लांट की सराहना की और क्षमता बढ़ाने को कहा था। उन्होंने कहा कि यहां मेडिकल आॅक्सीजन की अच्छी तरह से सप्लाई की जा रही है आगे भी कोई परेशानी नहीं आने दी जायेगी।

आखिर खाली सिलेंडर कहां से लायें?

शहर में आॅक्सीजन की स्थिति को लेकर काफी सुधार हुआ है। सभी प्लांटों पर भरपूर मात्रा में आॅक्सीजन उपलब्ध है। सभी अस्पतालों को आॅक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन आम आदमी का अभी भी यही सवाल है कि आॅक्सीजन तो भरपूर है, लेकिन खाली सिलेंडर कहां से लायें। खाली सिलेंडर को लेकर सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने भी कहा था कि खाली सिलेंडरों की किल्लत है।

जिसके चलते लोगों से अपील की गई थी कि जिनके पास ही खाली सिलेंडर हों वह अपना सिलेंडर जमा करा दें, लेकिन अभी तक भी यही स्थिति है। अगर किसी व्यक्ति के पास खाली सिलेंडर नहीं है तो उसे आॅक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पायेगी। यह आज भी लोगों के लिये परेशानी बना हुआ है कि वह खाली सिलेंडर का इंतजाम कैसे करें। नगर निगम की ओर से बनाये गये आॅक्सीजन वितरण केन्द्रों पर भी कुछ ऐसा ही हाल है। वहां भी उन्हीं लोगों को आॅक्सीजन सिलेंडर दिया जाता है, जो लोग खाली सिलेंडर लेकर आते हैं। जिनके पास खाली सिलेंडर नहीं है उन्हें अब भी आॅक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाती है।

मेरठ: सेना ने पांच दिन में दुरुस्त किया आॅक्सीजन प्लांट, उत्पादन शुरू

आॅक्सीजन को लेकर शहर में मारा-मारी मची थी। आॅक्सीजन के बिना लोगों की सांसे टूट रही थी। ऐसे मुश्किल दौर में रिठानी (परतापुर) में खराब चल रहे कृष्णा आॅक्सीजन प्लांट को चालू करने के लिए पांच दिन से सेना की बीस सदस्यों की टीम लगी थी। आखिर सोमवार को सेना की टीम ने इसमें कामयाबी पाते हुए आॅक्सीजन प्लांट को चालू कर दिया तथा आॅक्सीजन का उत्पादन भी शतप्रतिशत चालू हो गया है।

दरअसल, कृष्णा आॅक्सीजन प्लांट चालू तो पहले से था, लेकिन बीच में दिक्कत आ गई थी, जिसके बाद ही प्लांट मालिकों ने सेना से इसमें मदद मांगी थी। इसके बाद ही सेना की 20 सदस्य टीम इसको ठीक करने के लिए पिछले पांच दिन से लगी हुई थी।

सेना की यह टीम 22 रैपिड डिवीजन की 622 एटीए काम कर रही थी। आॅक्सीजन को लेकर शहर में बड़ी किल्लत हो गई थी। आॅक्सीजन नहीं मिलने से बड़ी तादाद में लोगों की सांसों की डोर भी टूटी है। भविष्य में आॅक्सीजन से जिंदगी खत्म नहीं हो, इसको दृष्टिगत रखते हुए सेना भी जिंदगी बचाने की मुहिम में जुटी हुई है। सोमवार को सेना के जवानों ने प्लांट को चालू कर दिया तथा कृष्णा प्लांट के मालिक मनोज अरोड़ा के सुपुर्द कर दिया। सेना की इसमें अहम् भूमिका रही तथा इसके लिए दुरुस्त करने में जो सेना की टीम जुटी थी, उसका प्लांट की तरफ से स्वागत किया गया। बताया गया कि पाइप लाइन ब्लॉक थी तथा इस अवरोध को दूर किया गया। आॅक्सीजन सिलिंडर के नोजल भी खराब थे, उनको भी दुरुस्त कर दिया गया।

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