जनवाणी ब्यूरो |
देहरादून: पलायन उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या है और लोगों का खेती छोड़ते जाना इसकी बड़ी वजह है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लोग बड़ी तेजी से खेती छोड़ रहे हैं क्योंकि जंगली जानवर न सिर्फ जमी-जमाई फसल को बर्बाद कर देते हैं बल्कि इंसानों पर भी हमले कर देते हैं। इसकी वजह से लोग खेती छोड़कर पलायन कर रहे हैं और पहाड़ उजाड़ हो रहे हैं। ऐसे में उत्तरकाशी से एक उम्मीद भरी और दिलासा देने वाली खबर आई है। उत्तरकाशी के एक सेब किसान के एक प्रयोग से दो साल से जंगली जानवर उनके खेतों से दूर हैं। आइए जानते हैं क्या है यह प्रयोग।
उत्तराखंड का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले हर्षिल में सेब की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां भी जंगली जानवर फसल के दुश्मन साबित होते हैं। आजकल भालू फसल और किसानों के दुश्मन साबित होते हैं तो सर्दियों-गर्मियों में बंदर और लंगूर। इनकी वजह से पिछले कुछ सालों से में लोगों का खेती किसानी से मोहभंग भी हो रहा है और वह इसे छोड़ रहे हैं।
सराकर खेती के लिए बहुत से उपकरण सब्सिडी पर उपलब्ध करवाती है लेकिन फसल को जानवरों से बचाने का कोई उपाय अब तक सरकार नहीं खोज पाई है। स्थानीय काश्तकार सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं कि वह फसलों को बचाने के लिए कुछ करे लेकिन अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है।
दो साल पहले हर्षिल के सेब काश्तकार सचेंद्र पंवार के खेत को जानवरों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया था। लेकिन हार मानने के बजाय सचेंद्र ने इसका उपाय ढूंढने का फैसला किया और इंटरनेट पर सर्च की। उन्हें पैलेट गन के रूप में एक समाधान दिखा।
एलपीजी से चलने वाली यह गन सेंसर युक्त होती है और जानवरों के करीब आते ही फायर कर देती है। यह गन जानवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती बस तेज आवाज करती है। इसकी आवाज से डरकर जानवर भाग जाते हैं। इसे लगाने में सचेंद्र के 37000 रुपये लगे हैं।
वह कहते हैं इस गन की वजह से पिछले दो साल में उनके खेतों से जानवर लगभग दूर ही हैं और उनका कोई नुकसान नहीं हुआ है। सचेंद्र कहते हैं कि सरकार ऐसी पैलेट गन्स पर भी अन्य कृषि उपकरणों की तरह सब्सिडी दे तो बड़े पैमाने पर किसान इन्हें लगाकर फायदा उठा सकते हैं। खेतों से जानवर दूर रहेंगे तो लोग फिर खेती करने लगेंगे।

