Saturday, June 12, 2021
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लगन और ललक

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एक बार सिकंदरिया के राजा टॉलमी को गणित सीखने का जोश सवार हुआ। इसके लिए उन्होंने गुरु की खोज शुरू की। उन्हें पता चला कि यूक्लिड महान गणितज्ञ हैं। उन्होंने उनसे ही गणित की शिक्षा लेने की सोची। यूक्लिड को राज दरबार में बुलाया गया। यूक्लिड ने राजा को गणित पढ़ाना स्वीकार कर लिया। वह प्रतिदिन राजा को गणित के सूत्र सिखाने लगे। लेकिन टॉलमी को गणित सीखने में आनंद ही नहीं आता था।

उनका ध्यान इधर-उधर भटकता रहता था। उन्होंने सोचा कि लोग तो कहते हैं कि यूक्लिड महान गणितज्ञ हैं और उनके जैसे विद्वान कम ही होते हैं, फिर वह मुझे सरलता से गणित क्यों नहीं सिखा पा रहे हैं? मैं उनसे यह प्रश्न अवश्य पूछूंगा। अगले दिन जब यूक्लिड राजा को गणित के कुछ सूत्र समझा रहे थे, तो राजा खीझ कर बोले, ‘श्रीमान, आप तो बड़े भारी विद्वान कहे जाते हैं। आप मुझे ऐसे सरल सूत्र सिखाइए न जो मुझे आसानी से समझ में आ जाएं। अभी तक मुझे तो गणित का एक शब्द भी सही से समझ में नहीं आया है।

ऐसे में मैं भला गणित का विद्वान कैसे बन सकता हूं?’ राजा की बात सुनकर यूक्लिड मुस्करा कर बोले, ‘राजन। मैं तो आपको सहज और सरल सूत्र ही सिखा रहा हूं। कठिनाई मेरे सिखाने में नहीं, बल्कि आपके सीखने में है। आपने गणित सीखने का फैसला तो कर लिया, पर उसके लिए मन को तैयार नहीं कर पाए। गणित हो या कोई अन्य विषय या फिर वह राजकाज ही क्यों न हो, यदि आप उस कार्य में रुचि नहीं लेंगे, उसे लगन और एकाग्रता से नहीं करेंगे तो वह कार्य कठिन ही लगेगा।

जिस सहजता से आप राजकाज संभालते हैं, उसी सहजता से आप गणित सीखें, अवश्य सफल होंगे।’ यूक्लिड की बातें राजा टॉलमी को समझ में आ गर्इं। उन्होंने एकाग्र होकर गणित सीखना आरंभ कर दिया। राजा टॉलमी गणित के महान विद्वानों में गिने जाते हैं।


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