Monday, February 9, 2026
- Advertisement -

पाप-पुण्य कर्मों का भुगतान

चन्द्र प्रभा सूद

मनुष्य को स्वयं अकेले ही अपने सभी पाप-पुण्य कर्मों के लेखे-जोखे का भुगतान करना होता है। वहां कोई भी उसका साथी नहीं बनता। यहां यह विचार करना आवश्यक है कि आखिर ये पाप और पुण्य होते क्या हैं? इस गुत्थी को सुलझाना बहुत कठिन है। इस रहस्य पर बड़े-बड़े ऋषि-मुनि उलझ जाते हैं तो फिर हम क्या चीज हैं? मेरे विचार में पाप का अर्थ करते हुए हम कह सकते हैं कि पाप वह कर्म है जो स्वयं को या दूसरों को दुख दे। नैतिक रूप से गलत हो और आत्मा को अपवित्र करे जैसे झूठ, चोरी, हिंसा आदि। इसके विपरीत पुण्य वह कर्म है जो आत्मा को पवित्र करे, सुख दे और नैतिक व धार्मिक मूल्यों का पालन करे – जैसे दान, सेवा, सत्य बोलना जो इस लोक और परलोक में सुखदायी होता है। यानी जो कार्य करने से मन को शान्ति मिले और दूसरों का भला हो, वह पुण्य कर्म है और जो कार्य करने से मन अशान्त हो और दूसरों को कष्ट पहुंचे, वह पाप कर्म है। भरी भीड़ में भी मनुष्य अपने आप को अकेला ही पाता है। गुरुवर रवीन्द्र नाथ टैगोर की निम्न पंक्ति सदा ही प्रेरणा देती है और मार्गदर्शन कराती है-

एकला चलो रे

यह पंक्ति हमें हमारा जीवन जीने के लिए महत्त्वपूर्ण सन्देश देती है कि अकेले चलने में घबराना नहीं चाहिए। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि दुनिया में अकेले वही चलते हैं जो साहसी होते हैं। जैसे शेर को जंगल में अकेले चलने के लिए किसी भी सहारे की आवश्यकता नहीं होती। उसी प्रकार मनुष्य को भी सहारों की बैसाखी नहीं तलाशनी चाहिए।

मनुष्य इस ससार में जब जन्म लेता है तो वह अकेला ही होता है। इसी प्रकार जब इस धरा से विदा लेता है तब भी अकेला होता है। न उसके साथ कोई आता है और न ही कोई जाता है। जब मृत्यु से जन्म की यात्रा मनुष्य एकाकी कर सकता है तो जन्म से मृत्यु तक की यात्रा अकेले करने में उसे कभी परेशानी होनी ही नहीं चाहिए। विचार कीजिए कि इस संसार में हम कब-कब अकेले होते हैं? यदि इसका हल हम कर लेते हैं तो फिर सारी समस्या ही हल हो जाती है। मनुष्य अपने पूर्वजन्म कृत कर्मों के फल स्वयं ही भोगता है। उसकी खुशी में तो सब शामिल हो सकते हैं पर उसके दुखों और परेशानियों को कोई नहीं बांट सकता। यह सच है कि जो भी कष्ट उसके शरीर के होते हैं या उसके मन के अवसाद होते हैं उनमें चाहकर भी कोई भागीदारी नहीं कर सकता। उन सबको अकेले ही भोगता रहता है। अन्य सभी परिवारी जन, मित्र या बन्धु उससे सहानुभूति रख सकते हैं। उसके पास भी खड़े हो सकते हैं पर अपने भोगों का भुगतान तो अकेले ही करना पड़ता है।

अपने पत्नी, बच्चों या अन्यों के लिए जो भी स्याह-सफेद वह करता है उसका जिम्मा केवल उसी का होता है किसी अन्य का नहीं। यहां मुझे महर्षि वाल्मीकि की घटना याद आ रही है। जंगल में राहगीरों को लूटने के उद्देश्य से रत्नानाकर डाकू ने ऋषियों को रोका। तब ऋषियों ने रत्नाकर को समझाया कि यह पाप कर्म छोड़ दो। जब वह नहीं माने तो उन्होंने कहा, घर जाओ। जिनके लिए तुम यह पापकर्म करते हो उनसे पूछो कि वे इसमें तुम्हारे साथी होंगे।

उन्होंने कहा, मुझे मूर्ख समझ रखा है? मैं घर जाऊंगा तो तुम यहां से भाग जाओगे।

ऋषियों ने कहा, तुम हमें बांधकर चले जाओ। फिर तो हम यहीं रहेंगे।

रत्नाकर को यह सुनकर विचित्र लगा उसने कहा, वे मेरे अपने हैं और मेरा ही साथ देंगे।
ऋषियों के जोर देने पर घर जाकर उसने अपने माता, पिता, पत्नी और बच्चों से वही प्रश्न किया। उन सबका का यही एक उत्तर था, परिवार के पालन-पोषण का दायित्व उसका है। वह पैसा कैसे कमाता है उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं। इसलिए वे सब उसके पापकर्म में भागीदार कदापि नहीं बनेंगे।

वे भागते हुए ऋषियों के पास गए और उनके पैर पकड़ लिए। उनसे माफी मांगी। यहीं से महर्षि के जीवन का एक नया अध्याय आरम्भ हुआ और वे युगों-युगों तक गाई जाने वाली पवित्र रामकथा के रचयिता बने।

मनुष्य के सुख और दुख के समय के अतिरिक्त उसके अकेलापन की पीड़ा भी उसकी अपनी होती है। जितना वह जीवन की ऊंचाइयों पर पहुंचता जाता है उतना ही अकेला होता जाता है। उसके सभी साथी एक-एक करके पीछे छूटते जाते हैं। वे हाथ बढ़ाकर तब उसे छू भी नहीं पाते। हमारे ऋषि-मुनि इसीलिए पुण्यकर्मों को करने और पापकर्पमों को त्यागने पर बल देते हैं ताकि जब उन कर्मों को भोगने का समय आए तो मनुष्य को रोना न पड़े। इस उक्ति को सदा स्मरण रखना चाहिए-सुख के सब साथी दुख में न कोई।

अर्थात सुख में लोग साथी बनने के लिए तैयार हो जाते हैं परन्तु दुख की स्थिति में कोई साथ नहीं निभाता। यानी दुख उसे अकेले ही झेलना पड़ता है। मनुष्य को अकेले ही अपने सारे कृत शुभाशुभ कर्मों को भोगना होता है। अत: शीघ्र जाग जाएं तो बहुत ही अच्छा है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

ये सरेंडर…सरेंडर क्या है?

मोदी जी के विरोधियों की यही बात हमें अच्छी...

गेमिंग की लत युवाओं को पहुंचा रही मौत तक

कौनसी तरकीब अपनाई जाए, जिससे बच्चें फिर से अपने...

कहां जा रहे गुमशुदा लोग?

हाल ही में दिल्ली में 807 लोगों के लापता...

Sharad Pawar: शरद पवार की तबीयत बिगड़ी, सांस लेने में परेशानी, पुणे अस्पताल में भर्ती

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के...
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here