एक सप्ताह बाद गुड़की घर पर आया। मैंने पूछा, इतने दिन कहां गायब रहे? वह बोला, अंकल! कितनी भी मेहनत कर लो घर का खर्च चलता नहीं। जो कुछ कमाता हूं, वह ऊंट के मुंह जीरे से भी कम नजर आता है। इसलिए खर्च के हिसाब से चौगुनी इनकम का गुंताड़ा बिठाने के फेर में एक एक्सपर्ट के पास गया था। उसने मुझे लक्ष्मी मैया की टनाटन सदा सुनाई देती रहे इसके लिए कुछ सूत्र बताएं हैं। मीठा बनकर ठगी करना भी एक सफल आय का स्रोत है। इसमें कोई झंझट भी नहीं है देने वाला राजी खुशी से ठगाई में आकर रुपयों की थैली खोल देता है। कुछ दिन ठगने की कला और कुछ दिन भ्रष्ट तौर तरीके से आय बढ़ाने का तरीका बताया। यदि मैं उसकी सिखाई हुई कला में माहिर हो गया तो रुपयों की कमी नहीं रहेगी। बस मौजा ही मौजा। मैं अभी चंट चालक बुद्धि का सजक हो उपयोग करूंगा। फिर देखना।
अरे भाई ,गुड़की यह तो सब गैर कानूनी कमाई होती है। कभी चक्कर में आ गए तो छटी का दूध याद आजाएगा। अरे अंकल! आप कौन से जमाने की बात कह रहे हो? वो जमाने गए, जब लोग गलत काम करते हुए डरा करते थे, समाज क्या कहेगा, सोचा करते थे। प्राय: छोटे-मोटे धंधे में तो ऐसी अप्रिय स्थिति आती नहीं और कभी आभी जाए तो कुछ ले देकर मामला सुलटा लिया जाता है। आखिर ऊपरी कमाई की तो सबको ना-ना करते चाहत बनी रहती है। कमाई से ही घर में मंगल गीत सुनाई देते हैं। मित्र रिश्तेदार स्वागत की तरह खड़े मिलते हैं। आज पड़ोस में सम्मान बना रहता है। बहन बेटियां भी आती जाती रहती हैं। सच तो यह है आज की दुनिया में बस पैसे की ही माया चारों तरफ चमक दमक रही है। देखो हमारे एक माननीय के यहां आय से अधिक इनकम होने से जांच एजेंसी द्वारा छापा मारा गया। उनके भंडार में लाखों रुपए का सोना, करोड़ों रुपये की नोटों की गड्डियां मिलीं। जिन्हें आदमी गिनते तो कई दिन लग जाते। इसलिए जांच एजेंसी वालों ने नोट गिनने की मशीनें मंगाई। इतनी
बड़ी लूट खसोट देख लोगों की आंखें खुली की खुली रह गई। अंकल मैं भी थोड़ा संपन्न होने के बाद कोई पार्टी ज्वाइन कर लूंगा और चुनाव लड़ूंगा। आखिर में भी तो जन प्रतिनिधि बन जनता की सेवा कार्य को हाशिये में धकेल अपने लिए कुछ सार्थक कदम उठा, मेवे मलाई को पाने की राह पर आगे बढ़ूंगा। आज की इस भौतिकवादी बाजारू संस्कृति में ईमानदारी, संस्कार तो सब दूसरों को शिक्षा देने के लिए होते हैं। बस जनता के सामने इनके गुणगान करते रहो। पर असल में वह सब करते रहो, जिनसे आपका लक्ष्मी जी का भंडार सदा भरपूर रहे। ये मत सोच लोग क्यों कहेंगे। कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।
मैं गुड़की के दिए गए पैसे कमाने के तर्क पर सोचता रहा। उसे गलत तरीके से पैसा कमाना गलत नहीं लगा। अब कैसा समय आ गया कि बेईमानी को लोग महिमा मंडित कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं। जनता तो ऐसे लोगों की उपलब्धि को टुकुर-टुकुर देखती रहती है।

