Thursday, April 23, 2026
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श्रद्धापूर्वक विदाई से प्रसन्न होंगे पितृ

  • पितृों को प्रसन्न करने से ही होते हैं मांगलिक कार्यक्रम
  • 17 सितंबर को मनाई जाएगी पितृ अमावस्या विधि विधान के साथ करे विसर्जन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पितृ अमावस्या के दिन को पितृों को विदा किया जाएगा, जोकि 17 सितंबर को मनाई जा रही है। पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार दान जरूर करना चाहिए।

जिससे ज्ञात अज्ञात संकट कट जाते हैं। आश्विन मास के कृष्णपक्ष का सम्बन्ध पितरों से होता है। इस मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाता है।

दरअसल, इस दिन धरती पर आए हुए पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है। किसी कारणवश अगर पूरे पितृ पक्ष में अपने पितरों को याद न किया हो तो केवल अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने से और निर्धनों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है। इस दिन दान करने का फल अमोघ होता है।

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आचार्य मनीष स्वामी

नौचंदी स्थित श्रीबाला जी मंदिर के महंत आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि स्मृतियों एवं पुराणों में भी आत्मासंसरण संबंधी विश्वास पाए जाते हैं और इनमें भी पितृ अर्पण के के लिए श्राद्ध संस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है।

मृत्यु के पश्चात पितृ कल्याण के लिए पहले दिन 10 दान और अगले 11 दिन तक अन्य दान किए जाने चाहिए। इन्हीं दानों की सहायता से पितरों की मृत आत्मा नई काया धारण करती है और अपने कर्मानुसार पुनर्रावृत्त होती है। पितृपूजा के समय वंशज अपने लिये भी मंगलकामना करते हैं।

महंत ने कहा कि स्वर्ग के आवास में पितृ चिंता रहित होकर परम शक्तिमान एवं आनंदमय रूप धारण करते हैं। पृथ्वी पर उनके वंशज सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए पिंडदान देते और पूजापाठ करते हैं।

वेदों में पितरों के भयावह रूप की भी कल्पना की गई है। पितरों से प्रार्थना की गई है कि वे अपने वंशजों के निकट आएं, उनका आसन ग्रहण करें, पूजा स्वीकार करें और उनके क्षुद्र अपराधों से अप्रसन्न न हों।

ये होती है पितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि होती है। 15 दिन तक पितृ घर में विराजते हैं और हम उनकी सेवा करते हैं फिर उनकी विदाई का समय आता है।

इसलिए इसे ‘पितृविसर्जनी अमावस्या’, ‘महालय समापन’ या ‘महालय विसर्जन’ भी इसे कहते हैं। अश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। ये दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। अगर आप पितृपक्ष में श्राद्ध कर चुके हैं तो भी सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना जरूरी होता।

विसर्जन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो, तब पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम है।
  • आप सभी पितरों की तिथि याद नहीं रख सकते, ऐसी स्थिति में भी पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए।
  • इस दिन किसी सात्विक और विद्वान ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने व आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।
  • स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनायें, भोजन सात्विक हो और इसमें खीर पूड़ी का होना आवश्यक है।
  • भोजन कराने तथा श्राद्ध करने का समय मध्यान्ह होना चाहिए।
  • श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण को भोजन करायें, उनका तिलक करके, दक्षिणा देकर विदा करें।
  • घर के सभी सदस्य एक साथ भोजन करे और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
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