Friday, March 20, 2026
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कवि परमेंद्र सिंह वर्ष 2022 के डा. कृष्णचन्द्र गुप्त सम्मान से सम्मानित

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: रविवार को मुजफ्फरनगर के स्वरुप प्लाजा मॉल में स्थित आयोजित समारोह में कवि परमेंद्र सिंह को वर्ष 2022के डा. कृष्णचन्द्र गुप्त सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान में उन्हें सम्मान प्रतीक चिह्न, शॉल और मानदेय के रुप में 5100 रुपए की राशि भेंट की गई।

डा. कृष्णचन्द्र गुप्त स्मृति न्यास, दिल्ली के तत्वावधान में हुए इस समारोह की अध्यक्षता प्रो. जेपी सविता ने की। मुख्य अतिथि डा. बीएस त्यागी रहे। मुख्य वक्ता प्रो. आरएम तिवारी और विशिष्ट वक्ता के रुप में डा. रमेश प्रजापति, अश्वनी खंडेलवाल, राकेश कौशिक और कमल त्यागी उपस्थित रहे।

इस महत्वपूर्ण साहित्यिक समारोह का संचालन रोहित कौशिक ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डा. बीएस त्यागी ने कहा कि प्रमेन्द्र सिंह समकालीन कविता के महत्वपूर्ण कवि हैं। इनकी कविताएं आत्मसात की जाने वाली कविताएं हैं जिनके निहितार्थ बड़े हैं। प्रो. आरएम तिवारी ने इस अवसर पर कहा, परमेन्द्र की कविताएं हृदय से निकली कविताएं हैं। सामाजिक सरोकारों का आक्रोश इनमें साफ देखा जा सकता है जिसे प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की कला परमेन्द्र में है।

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डा. रमेश प्रजापति ने कहा कि परमेन्द्र की कविताओं का फलक बड़ा हैं। इनकी कविताएं ठहरकर पढ़ी जाने वाली कविताएं हैं। इन कविताओं को खोलने की कला सामान्य आलोचक में नहीं है। कम शब्दों में गहरी विषमताओं को वाणी देती यह कविताएं कालजई कविताएं हैं जो हमेशा विद्यमान रहेंगी।

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अश्वनी खंडेलवाल ने कहा, संवेदना से रहित आदमी न तो अच्छा कवि हो सकता है और न ही व्यक्ति हो सकता है। परमेन्द्र संवेदना की गहराइयों में उतरने के बाद शब्दों को कविता में पिरोते हैं। अपने आसपास को और आम आदमी की पीड़ा को वह शिद्दत से महसूस करते हों, यह उनकी कविताओं में देखा जा सकता है। राकेश कौशिक ने कहा, परमेंद्र का मौलिक कवियों में अलग ही स्थान है। कमल त्यागी ने कहा, जीवन और संवेदना को व्यक्त करने में जिन कवियों ने रचनाकर्म किया है उनमें परमेंद्र का विशेष स्थान है।

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इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार डा. कृष्णचन्द्र गुप्त के व्यक्तित्व और कृतित्व का भाव भीना स्मरण किया गया। नए रचनाकारो को किस प्रकार वह जीवन भर अग्रणी साहित्यिक संस्था वाणी के माध्यम से बढ़ावा देते रहे, यह भी स्मरण किया गया।

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इस समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने सहभागिता की। इनमें डा. प्रदीप जैन, तरुण गोयल, नेमपाल प्रजापति, संदीप गुप्ता, तुषार गुप्ता, सविता वर्मा गजल, शिवकुमार समन्वय, सुशीला जोशी, सुनीता सोलंकी मीना, संतोष शर्मा फलक सपना अग्रवाल, इंदु राठी, सुशीला शर्मा, अंजु गौड़, विपुल शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, पुष्पा रानी, समीर कुलश्रेष्ठ, परविन्दर कौर, मनोज अग्रवाल, डा़ अरविन्द कुमार, राजन सिंहल आदि उल्लेखनीय हैं।

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