Friday, March 27, 2026
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नाले के पानी से जहरीली हो रही धरती की कोख

  • कसेरूखेड़ा नाले की वजह से दूषित हो रहा पानी, इसे पीने से लोगों को कोरोना काल में इम्युनिटी कमजोर होने का सता रहा डर
  • पानी में टीडीएस की मात्रा आ रही ज्यादा, इससे बीमार होने का खतरा

मनोज राठी |

गंगानगर: धरती की कोख, जनपद का जल तेजी के साथ जहरीला होता जा रहा है। हाल ये है शहर के अधिकांश क्षेत्रों में भूगर्भ जल में टीडीएस की मात्र मानकों से कई गुना अधिक हो गई है। वहीं, कसेरूखेड़ा नाले की वजह से जल में प्रदूषण के चलते नागरिकों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। पर्यावरण को लेकर सरकारी दावे भले ही लंबे चौड़े किए जाते रहे हों, लेकिन धरातल पर हालात बदतर है।

आलम ये है कि नगर निगम के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शोपीस बने हैं। दर्जनों कॉलोनी से निकलने वाले सीवर सीधे नाले में समा रहे हैं। कसेरूखेड़ा नाले के पास स्थित डिफेंस, मीनाक्षीपुरम, रक्षापुरम, खटकाना पुल आदि कॉलोनी के करीब 800 से अधिक परिवार जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। यहां पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा आ रही है।

इस पानी से बीमार होने का खतरा है, जिससे कोरोना काल में इम्युनिटी कमजोर हो जाएगी। अब इस पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक है, जिससे वह पीने लायक नहीं है। पीने का पानी बहुत ही खारा है। दो से तीन माह में ही आरओ फेल हो जाता है। कपड़े भी सही से नहीं धुलते हैं।

कसेरूखेड़ा, मीनाक्षीपुरम, रक्षापुरम, खटकाना पुल, डिफेंस कॉलोनी की हालात यह है कि यदि पंपों का पानी किसी बर्तन में रख दिया जाए, तो कुछ समय बाद ही वह पीला पड़ जाता है। ऐसे में लोगों को फिलहाल सबमर्सिबल के पानी का सहारा है। हालांकि वह भी खराब होता जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्षेत्र में दो भारी भरकम सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। फिर भी दर्जनभर कॉलोनियों का सीवर सीधा नाले में डल रहा है। जिससे नाला और भी अधिक जहरीला होता जा रहा है। कसेरूखेड़ा नाला अब पूर्ण रूप से जहरीला हो चुका है।

गंदे नालों के साथ मिलों का रासायनिक पानी छोड़े जाने से नाले में हानिकारक तत्व घुल रहे हैं। शहर से निकलने वाले गंदे नालों के साथ मिलों का रासायनिक पानी भी छोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर नदी के पानी की शुद्धता पर पड़ रहा है। नाले के बहते पानी में उठती सड़ांध दूर तक लोगों को महसूस होती है। भू-जल में फ्लोराइड, आर्सेनिक, लौह व नाइट्रेट जैसे तत्वों, लवणों और भारी धातुओं की मात्रा इस कदर बढ़ चुकी है कि इससे त्वचा संबंधी रोग, हड्डियां कमजोर पड़ना, कैंसर, हैजा, टाइफाइड, डायरिया व गठिया जैसे रोग दस्तक दे रहे हैं।

गंभीर बीमारी की चपेट में नागरिक

दूषित पानी पीने से लोगों की सेहत खराब हो सकती है। गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। कई बार लोगों के समस्या उठाने के बाद प्रशासन का रवैया उदासीन है। जिम्मेदार अधिकारी गंदे पाने को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। दूषित पानी से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को डेंगू और मलेरिया हो सकता है।

दूषित पानी के प्रति रहना होगा सजग

नागरिकों को दूषित पानी के प्रति सजग रहना होगा। जबकि पानी का अत्याधिक दोहन हो रहा है। इसके चलते वाटर लेवल गिर रहा है। जमीं की धारा में दूषित जल के चलते टीडीसी की मात्रा बढ़ती जा रही है। साथ ही खेतीबाड़ी में प्रयोग रासायनिक खादों की अधिकता के साथ प्रयोग करने से भी पानी दूषित हो रहा है। समय रहते नहीं चेते तो पानी का खारापन बढ़ता जाएगा।

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दूषित पानी से ये होती हैं बीमारी

करोड़ों लोग इस फ्लुओरेसिस बीमारी का मुकाबला कर रहे हैं। इस बीमारी के होने पर ये लोग जोड़ों के दर्द जैसे कमर में दर्द, गर्दन में दर्द, पीठ में दर्द और घुटनों में दर्द से पीड़ित होते हैं। इतना ही नहीं, इस बीमारी से पेट की आंतरिक बीमारियां जैसे भूख न लगना, डायरिया हो जाना, नाक बहना, थकान अनुभव करना आदि भी हो जाती हैं।

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…तो जमीन में पैदा होंगे जहरीले अनाज

रासायनिक खादों के लगातार प्रयोग के चलते भूमि की अम्लीयता बढ़ती जा रही है। निश्चित सीमा से अधिक अम्ल की मात्रा होने पर भूमि में होने वाली पैदावार भी जहरीली हो जाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जनपद की भूमि का पीएच मान 6.8 है। अम्लीयता बढ़ने के कारण पीएच मान घटता जाता है।

यदि भूमि का पीएच मान 5.9 तक पहुंच गया तो वहां की मिट्टी को कैंसर हो जाता है, जिससे भूमि की उर्वरता नष्ट हो जाती है। पेड़-पौधे मरने लगते हैं। यदि इस भूमि पर अन्य उत्पादन किया जाता है तो वह भी जहरीला होता है जो मनुष्य के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो जमीन में जहरीले अनाज पैदा होंगे।

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