- करोड़ों के घोटाले में अकेले मेरठ में 200 मुकदमे हैं दर्ज
ज्ञान प्रकाश |
मेरठ: करोड़ों रुपये के आपूर्ति घोटाले में लगभग तीन साल बाद क्राइम ब्रांच ने फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये वारंट जारी कराने शुरू कर दिये है। ऐसे में तमाम आरोपी जान बचाने के लिये अदालतों के चक्कर काटने में लगे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि तीन सालों में अभी तक सिर्फ आठ आरोपी ही जेल भेजे गए हैं।
करोड़ों रुपये के राशन घोटाले की जांच पहले एसटीएफ और बाद में क्राइम ब्रांच के बीच पिसकर रह गई है। पूर्व में एसपी क्राइम का जिले से तबादला हुआ तो बाद में विवेचना करने वाले एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर भी बदलते रहे। 2018 में दर्ज हुए मुकदमों के बाद सिर्फ आठ लोगों की ही गिरफ्तारी हुई है। घोटाले के मुख्य आरोपियों को हर स्तर पर बचाया जा रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कई जिलों में अपात्रों को फर्जी तरह से राशन के नाम पर घोटाले की शिकायत मख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से की थी।
इसके बाद जुलाई, 18 में जिले में अलग-अलग थानों में 84 मुकदमे दर्ज कर जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। एसआईटी की जांच में सामने आया कि जिन 222 लोगों के आधार कार्ड की आईडी व पासवर्ड का प्रयोग कर 27 हजार से अधिक अपात्र लोगों का राशन निकाला गया है। इन मुकदमों में आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर वादी थे। एसआईटी की जांच में आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टरों की मिलीभगत सामने आई।
इन इंस्पेक्टरों के लखनऊ में बयान होने थे, लेकिन कोरोना कॉल में विभागीय जांच की बात कहकर कार्रवाई नहीं हुई। मुकदमा दर्ज होने के समय एसपी क्राइम बीपी अशोक थे। बाद में एसपी क्राइम रामअर्ज के हिस्से में यह जांच आई। बाद में उनका भी तबादला हो गया। अब एसपी क्राइम अनित कुमार इस घोटाले की जांच कर रहे हे।। इस समय विवेचना में चार इंस्पेक्टर शामिल हैं।
एसपी क्राइम ने बताया कि अन्य जो भी लोग घोटाले में शामिल हैं, उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। वहीं, तमाम आरोपी जिनके गिरफ्तारी के वारंट जारी हो चुके हैं और फरार चल रहे हैं उनको यह चिंता सताये जा रही है कि एसएसपी के द्वारा वारंटियों को पकड़ने के लिये चलाये जा रहे अभियान में कहीं उनको जेल न भेज दिया जाए। इस कारण वारंटी वकीलों के चक्कर काटने में लगे हुए हैं।

