Friday, June 19, 2026
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इस साल कालानमक धान के बम्पर पैदावार के आसार

  • भौगोलिक सूचकांक वाले 11 जिलों में 70 हजार हेक्टेयर रकबे में हुई है कालानमक की खेती
  • किसानों की आय इस वर्ष तीन गुनी तक होने की उम्मीद

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: सरकार से मिले प्रोत्साहन के चलते बुवाई का रकबा बढ़ने के साथ अंतिम समय में भरपूर पानी की उपलब्धता से इस साल कालानमक धान के बम्पर पैदावार के आसार हैं। खेतों में लहलहाती फसल को देखकर कृषि वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि कालानमक धान का उत्पादन दोगुना तक हो सकता है।

भौगोलिक सूचकांक वाले गोरखपुर, बस्ती व देवीपाटन मंडलों के 11 जिलों में कालानमक धान का क्षेत्रफल 70 हजार हेक्टेयर में पहुंच चुका है। जबकि पांच साल पहले यह सिमट कर करीब 10 हजार हेक्टेयर तक रह गया था। रकबे में इस वृद्धि का श्रेय योगी सरकार को जाता है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसकी ब्रांडिंग के कारण किसानों का रुझान कालानमक की खेती की तरफ तेजी से बढ़ा।

इस साल सिद्धार्थनगर जिले में 12 हजार हेक्टेयर, गोरखपुर में 10 हजार, बस्ती में 9 हजार, कुशीनगर में 8 हजार, महराजगंज में 8 हजार, देवरिया में 7 हजार, संतकबीरनगर में 6 हजार, बहराइच में 4 हजार, गोंडा में 4 हजार, बलरामपुर में 3 हजार तथा श्रावस्ती में 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में कालानमक धान की खेती हुई है। इन जिलों के अलावा अयोध्या और बाराबंकी के किसानों ने भी कालानमक धान की खेती के प्रति उत्साह दिखाया है।

कृषि और खासतौर पर कालानमक धान के क्षेत्र में शोध-अनुसंधान करने वाली संस्था पार्टिसिपेटरी रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन (पीआरडीएफ) की टीम ने सर्वे के बाद यह अनुमान लगाया है कि इस साल कालानमक की अबतक की रिकार्ड पैदावार होगी। टीम ने यह अनुमान फसल की बालियों की औसतन 30 सेमी लंबाई देखकर लगाया है।

कालानमक की चार प्रजातियों केएन 3, बौना कालानमक 101, बौना कालानमक 102 तथा कालानमक किरण किसानों के खेतों में लहलहा रही हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ आरसी चौधरी का कहना है कि इस साल कालानमक की खेती करने वाले किसानों की आमदनी गत वर्षों की तुलना में तिगुनी तक हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही मंशा भी है कि किसानों की आय में अभूतपूर्व इजाफा हो।

डॉ चौधरी कालानमक की खेती के संरक्षण और संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई ओडीओपी योजना को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि करीब तीन हजार साल पुराने बुद्धकालीन कालानमक चावल को इसके मूल स्थल सिद्धार्थनगर की ओडीओपी में शामिल कर इसकी खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।

कालानमक महोत्सव का आयोजन हो या फिर मेहमानों को इस चावल को गिफ्ट के रूप में देना, इसकी जबरदस्त ब्रांडिंग की। अब तो सिद्धार्थनगर में कालानमक के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना भी हो गई है।

उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनेगा कालानमक

पड़ोसी के घर तक पहुंचने वाली खुश्बू, बेजोड़ स्वाद एवं पौष्टिकता के लिहाजा से आप कालानमक चावल को दुनिया का श्रेष्ठतम चावल माना जाता है। बुद्ध के प्रसाद के रूप में विख्यात कालानमक चावल अपने निहित पोषक तत्वों के चलते उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनेगा। कालानमक में अन्य प्रजाति के चावल की तुलना में तीन गुना अधिक आयरन, चार गुना अधिक जिंक के साथ ही प्रचुर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। कम ग्लूकोज के कारण इसे मधुमेह के रोगी भी भरपेट खा सकते हैं।

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