- खतौली उपचुनाव में हार के बाद भाजपा कर रही संगठन स्तर पर समीक्षा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भाजपा पश्चिमी यूपी में संगठन को लेकर बड़े फेरबदल की तैयारी में जुट गई है। कभी भी यह संदेश मिल सकता है कि भाजपा का पश्चिमी क्षेत्र के संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन कर दिया गया है। इसको लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कवायद में लगा हुआ है। कहा जा रहा है कि यह फेरबदल खतौली विधानसभा उपचुनाव में हुई पराजय के बाद जो समीकरण बनकर उभरे हैं, उसको देखते हुए किया जा रहा है। यह भी सूत्रों का दावा है कि पश्चिमी यूपी में किसी गुर्जर नेता को संगठन की कमान सौंपी जा सकती है।
वर्तमान में भाजपा पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष मोहित बेनीवाल है, लेकिन उनका रुतबा खतौली विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद कम हुआ है। वैसे उनकी फिर से ताजपोशी की चर्चा भी हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि मोहित बेनीवाल की विदाई के साथ ही जाटों से भी संगठन के तौर पर किनारा पार्टी हाईकमान कर सकती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मजबूत स्थिति में है। ऐसे में जाटों से किनारा कर पाना असंभव है। यदि भाजपा ने ऐसा किया तो विपक्षी दलों को और मजबूती मिलेगी।
दरअसल, भाजपा खतौली विधानसभा उपचुनाव की हार के बाद से आहत है। इसी वजह से पश्चिमी क्षेत्र के भाजपा संगठन से जाट नेताओं को दूरी बनाने के भी प्रयास किए जा सकते हैं, लेकिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता कि पश्चिमी यूपी में जाटों के बिना जीत की नाव का तैर पाना असंभव है। यही वजह है कि अब इसी बात पर मंथन भाजपा के शीर्ष नेताओं में चल रहा है कि पश्चिमी यूपी में जाटों को फिर से महत्व दिया जाए या फिर नहीं? क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। तमाम पार्टी 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं।
ऐसी स्थिति में भाजपा को पश्चिमी यूपी के लोगों का सामना करना पड़ेगा। यही नहीं, चुनाव हारने के बाद राजनीति के नेपथ्य में चले गए यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को फिर से सक्रिय तथा अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है, वहीं पूर्व विधायक संगीत सोम को भी बड़ी जिम्मेदारी पार्टी संगठन के तौर पर दे सकती है। दरअसल, दोनों ही नेता दिग्गज हैं। फिर पश्चिमी यूपी में भाजपा को मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से विशेष पहचान दिलाने में इन दोनों नेताओं की भूमिका रही थी। पश्चिमी यूपी में गुर्जर समाज को भी अहम जिम्मेदारी देने के मूड में शीर्ष नेतृत्व है।
हालांकि डा. सोमेंद्र तोमर को ऊर्जा राज्यमंत्री बना रखा है, लेकिन चर्चा यह भी है कि डा. सोमेंद्र तोमर को पश्चिमी संगठन की कमान देने की भी इच्छा पार्टी हाईकमान ने की है, लेकिन उन्हें यूपी कैबिनेट में भी जगह दी जा सकती है। ऐसी चर्चाएं भी चल रही हैं। कई गुर्जर नेता पश्चिमी यूपी में है, जिनको भाजपा पश्चिमी क्षेत्र के संगठन में लाकर राजनीति की गुगली विपक्षी दलों के सामने फेंक सकती है।
हालांकि चर्चा तो यह भी है कि ओबीसी से ही पश्चिमी यूपी क्षेत्र अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी को दी जा सकती है? आने वाले एक सप्ताह के अंदर भाजपा पश्चिमी यूपी में संगठन में बड़े फेरबदल कर सकती है। इसकी प्रबल संभावनाएं हैं । इसको लेकर ही पार्टी शीर्ष नेतृत्व पर मंथन चल रहा है। क्योंकि पश्चिमी यूपी 2024 के लिए जीत का आधार अभी से तलाश रही हैं, इसमें भाजपा के दिग्गज नहीं चाहते ही 2024 में किसी तरह की दिक्कत पैदा हो। इससे पहले ही तमाम गोटी फिट कर विपक्षी दलों को राजनीति के अखाड़े में चित्त करने की तैयारी अभी से चल रही हैं।

