- छात्र-छात्राओं को मेडल देकर किया जाएगा सम्मानित, छात्र-छात्राएं बोले-कामयाबी के शिखर को छुएंगे
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 21 फरवरी को 16वें दीक्षांत समारोह में मेडल वितरित किए जाने वाले छात्र-छात्राओं में छह छात्रों को कुलपति स्वर्ण पदक, छह कुलपति रजत पदक, छह छात्रों को कुलपति कांस्य पदक से सम्मानित किया जाएगा। जिसकी तैयारी पूरे जोर-शोर से की जा रही है। विश्वविद्यालय को सजाया जा रहा है। सुरक्षा की पूरी तैयारी हो चुकी है। 21 फरवरी को राज्यपाल सभी छात्र-छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित करेगी।
छात्र-छात्रों से बातचीत
- माता-पिता को मानती हूं आदर्श: साक्षी
कुलपति स्वर्ण पदक लेने वाली बीएससी आॅनर्स कृषि की छात्रा साक्षी यादव का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि उनका नाम मेडल के लिए चयनित हो गया है तो वह और परिजन खुशी से फुले नहीं समाई। उन्हें यह प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली है।
परिवार में उनके पिता किसान है और मां सरकारी नौकरी करती थी। जोकि जुलाई में रिटायर हो चुकी है। अब वह नौकरी ढूंढने के साथ मास्टर्स की तैयारी कर रही है। अगर उन्हे मौका मिला तो देश के लिए कुछ करेंगी। उन्होंने बताया कि वह माता-पिता को अपना आदर्श मानती है।
- पीएचडी करना चाहता है कु. शैलेश
बीएससी आॅनर्स कृषि की छात्रा कु. शैलेश ने बताया कि कुलपति रजत पदक मिलने की उन्हें बहुत खुशी है। वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। वह हिंदू विश्वविद्यालय बनारस से मास्टर्स की तैयारी कर रही है। वह अपने ही फील्ड में पीएचडी करना चाहती है। उनकी मां प्राइवेट नौकरी करती है। परिवार में दो बहनें और एक भाई ही रहते हैं। उन्हे ये सब करने के प्रेरणा मां से मिली है।
- मेडल मिलने की खुशी है: अंजली चौधरी
अंजली चौधरी ने बताया कि मेडल मिलने से वह बहुत खुश है। वह कृषि यूनिवर्सिटी मोदीपुरम से एमटेक कर रही है। उनका सपना साइंटिस्ट बनने का है। वह अपनी कामयाबी का स्रोत माता-पिता को बताती है।
- खेती से है काफी लगाव: अंकुर सिंह
बीटेक (कृषि अभियांत्रिकी) के छात्र अंकुर सिंह ने बताया कि वह आगे फूड विभाग में रिचर्स एंड डेवलपमेंट में कुछ नया करना चाहते हैं। माता-पिता किसान है। साथ ही उन्हें भी कृषि से काफी लगाव हो गया था। वह पिता को अपना आदर्श मानते हैं और उन्ही के बताए रास्ते पर चलते हैं।
अपनी सफलता के पीछे वह माता-पिता को बताते हैं। किसानों के लिए जो आधुनिक तकनीक आ रही है। उन्हे किसानों तक पहुंचाने का काम करेंगे। फिलहाल वो आईआईटी खड़कपुर फूड प्रोसेसिंग इंजीनियरिंग एमटेक कर रहे हैं।
- देश का करना चाहती है नाम रोशन
छात्रा श्रद्धा का कहना है कि वह कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को देना चाहती है। वह साइंटिस्ट बनकर देश को नई-नई टेक्नोलॉजी देना चाहती हैं और देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
- पढ़ाई पूरी कर करूंगा नौकरी: अवनीश
बीटेक कृषि के छात्र अवनीश चौहान ने बताया कि वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। आईआईटी रुड़की से एमटेक हेड्रोलोजी कर रहे हैं। आगे अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी करेंगे।

- फूड टेक्नोलॉजी में बनाना है करियर: अर्पणा
अपर्णा यादव कहना है कि वह फूड टेक्नोलॉजी में अपना करियर बनाना चाहती है। अपनी सफलता के पीछे में अपने माता-पिता को बताते हैं।
- गौरी अग्रवाल भी बनना चाहता है साइंटिस्ट
गौरी अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 2023 में गेट क्वालीफाई किया है। वह कामयाबी के पीछे माता-पिता को बताती हैं। उनके माता-पिता दोनों डाक्टर है। फिलहाल वह मास्टर्स कर रही है। वह मां डा. प्रीति को अपनी प्रेरणा मानती है। उनका सपना साइंटिस्ट बनने का है।
- मेडल का श्रेय दादाजी को: केशव तिवारी
वर्तमान में जबलपुर यूनिवर्सिटी से एमटेक करने वाले केशव तिवारी मेडल मिलने का सारा श्रेय दादाजी को देना चाहते हैं। वह दादाजी को अपना आदर्श मानते हैं। भविष्य में वह रिचर्ज एंड डेवलपमेंट में करियर बनाना चाहते हैं। अपनी सफलता के पीछे वह माता-पिता को मानते हैं। वह मेडल लेने के लिए नहीं आ सकते हैं, क्योंकि 19 से 28 तक वह परीक्षा में व्यस्त है। कालेज की ओर से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
- साइंटिस्ट बनना चाहती है उत्तम पटेल
बीटेक बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा उत्तम पटेल ने बताया कि वह वर्तमान में आईआईटी खड़कपुर से एमटेक कर रही है। वह सफलता के पीछे पिता और डाक्टर चाचा को मानती है। आगे भविष्य में वह साइंटिस्ट बनना चाहती है।
- देश के लिए करना है कुछ: प्राजंलि कौर
प्राजंलि कौर सिद्धू ने बताया कि वह अभी पिलानी राजस्थान से एमटेक कर रही है। उनके पिता एयरफोर्स से रिटायर्ड है। अगर उन्हें मौका मिला तो वह भी देश के लिए कुछ करेंगे। मेडल मिलने से वह बहुत खुश है।
- फ्रूट साइंटिस्ट बनना चाहती है रिद्धि बिष्ट
गोविंद वल्लभ पंत यूनिवर्सिटी पंतनगर से एमएससी करने वाली छात्रा रिद्धि बिष्ट का कहना है कि कामयाबी का श्रेय माता-पिता को देना चाहती है। माता-पिता के बताए रास्ते पर चलकर ही वह आज इस मुकाम तक पहुंची है। वह फ्रूट साइंटिस्ट बनना चाहती है और देश का नाम रोशन करना चाहती है।

