- न्यूटिमा हॉस्पिटल में बवाल के बाद 70 हजार छोड़े
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 10 माह से सस्पेंड चल रहे हापुड़ में तैनात एक दारोगा की जहर खाने से मौत हो गई। परिजनों ने न्यूटिमा हॉस्पिटल के बिल को लेकर हंगामा कर दिया। मेडिकल पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल प्रबंधन से बात करने के बाद बिल के 70 हजार रुपये माफ करवा दिये। बाद में परिजनों ने दारोगा को सुपुर्दे कर दिया।
मेडिकल थाना प्रभारी ने बताया कि संभल जिले के गांव एंचौला निवासी 30 वर्षीय मिक्की मियां दारोगा थे। इस वक्त वो हापुड़ के बहादुरगढ़ थाने में थे। पुलिस ने बताया कि 10 माह से वह निलंबित चल रहे थे।
मंगलवार को उन्होंने जहर खा लिया था। घर वालों ने उनको पहले हापुड़ में भर्ती कराया और बाद में उनको न्यूटिमा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया था। एसओ ने बताया कि शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई।
भाई फैसल ने बताया कि तीन दिन से मिक्की मिंया का न्यूटिमा में इलाज चल रहा था। शुक्रवार तक तीन लाख रुपये जमा करा दिए गये थे। सुबह मौत होने पर न्यूटिमा स्टाफ ने उन्हें 70 हजार रुपये का और बिल जमा करने को कहा। इस बात को लेकर बहस हुई और हंगामा शुरू हो गया।
परिजनों ने शास्त्रीनगर एल ब्लॉक चौकी इंचार्ज पवन गंगवार और हापुड़ से दारोगा अजहर खान को भी बुला लिया। शव न देने पर हंगामा किया। पुलिस का कहना है कि परिजनों का आरोप था कि तीन दिन में हॉस्पिटल ने तीन लाख 70 हजार रुपये का बिल बना दिया।
उसके बावजूद डॉक्टरों की लापरवाही के चलते उनकी मरीज की जान नहीं बची। हालांकि हंगामे के बाद न्यूटिमा ने 70 हजार रुपये छोड़ दिए और शव उनके सुपुर्द कर दिया। बाद में परिजनों ने शव को सुपुर्दे-ए-खाक कर दिया।

