Tuesday, March 17, 2026
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Putrada Ekadashi 2025: श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी आज, जानें व्रत का महत्व और पूजन विधि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। वैसे तो हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन श्रावण जैसे पवित्र माह में आने वाली यह एकादशी विशेष रूप से फलदायक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा करने तथा व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और जीवन के समस्त दुखों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इस दिन केवल भगवान विष्णु ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की भी पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। कहा जाता है कि शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना से यह व्रत और भी प्रभावशाली बन जाता है।

हर साल दो बार पुत्रदा एकादशी आती है, पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष मास में, लेकिन सावन में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है, का विशेष महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस वर्ष पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और व्रत के पारण का सही समय, ताकि आप भी इस पावन व्रत से पूर्ण फल प्राप्त कर सकें।

तिथि

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ – 04 अगस्त 2025 , प्रातः 11:41 से
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त – 05 अगस्त 2025, दोपहर 01:12 पर
उदयातिथि के अनुसार सावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त 2025 को मानी जाएगी।

मुहूर्त

पूजन का ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04:20 से प्रातः 05:02 बजे तक
रवि योग – प्रातः 05:45 से प्रातः11:23 बजे तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक
सायंकाल पूजन मुहूर्त – सायं 07:09 बजे से सायं 07:30 बजे तक

पारण का समय

सावन पुत्रदा एकादशी के अगले दिन यानी 6 अगस्त को प्रातः 5 : 45 मिनट से 8 : 26 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं। पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 02:08 मिनट पर है।

महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, और जब बात पुत्रदा एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस व्रत को हर साल दो बार रखा जाता है। पहली बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में। श्रावण महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का आयोजन इस वर्ष अगस्त में होगा, जबकि पौष मास की पुत्रदा एकादशी दिसंबर या जनवरी में पड़ सकती है।

श्रावण की पुत्रदा एकादशी को पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इसके साथ ही इस एकादशी पर भगवान शिव की आराधना करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति, पारिवारिक खुशियाँ और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

श्री विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||

क्लेश नाशक श्री विष्णु मंत्र
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः |

विष्णु गायत्री मंत्र

नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

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