Monday, March 16, 2026
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रामकुंज: न सील लगी और न बुलडोजर चला

  • लावड़ रोड पर सोफीपुर श्मशान घाट से सटी विवादित जमीन का मामला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छह माह पहले लावड़ रोड स्थित सोफीपुर में रामकुंज कॉलोनी पर सील लगाने की बात मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने की थी। सील अब तक नहीं लगी। ध्वस्तीकरण तो दूर की बात हैं। अभी तक इंजीनियरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी बीच एमडीए इंजीनियरों की लापरवाही के चलते यहां दुकानों का निर्माण हो गया। प्लाट भी बेच दिये गए। यह विवादित भूमि पर कॉलोनी काटी जा रही हैं, लेकिन एमडीए इंजीनियर रोक नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही हैं। कमिश्नर के आदेश के बाद भी इस कॉलोनी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं।

लावड़ रोड स्थित सोफीपुर श्मशान घाट से सटकर इस अवैध कॉलोनी की दीवार हैं। यह कॉलोनी अनिल चौधरी की है। यह सोफीपुर सैन्य शूटिंग रेंज के दायरे में यह कॉलोनी आती हैं, फिर भी यहां पर अवैध निर्माण किये जा रहे हैं। इसमें भी एमडीए कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा हैं, यह बड़ा सवाल हैं। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने एक माह पहले अवैध कॉलोनी व अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिये थे।

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करीब 35 अवैध निर्माणों को एमडीए गिरा चुका हैं, लेकिन रामकुंज कॉलोनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आखिर इसके लिए जवाबदेही किसकी हैं? कमिश्नर के आदेश के बाद भी अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? यहां पर 20 से ज्यादा दुकानों का निर्माण इस कॉलोनी में कर दिया गया हैं। व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए दुकान भी बनाई जा रही है और पीछे के रास्ते में प्लाटिंग भी की जा रही थी।

छह माह पहले इस कॉलोनी पर सील लगाने की बात एमडीए इंजीनियर कर रहे थे, लेकिन नहीं तो इसमें सील की कार्रवाई की गई और नहीं ध्वस्तीकरण किया गया। आखिर इस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से एमडीए के इंजीनियर क्यों बच रहे हैं? इसमें किसका दबाव हैं, जिसके चलते सील की कार्रवाई भी नहीं की गई। फिर यह जमीन भी विवादित हैं।

विवादित जमीन पर बुलडोजर चलाने में तो एमडीए पलभर में कार्रवाई करता है, मगर इस पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहा हैं? सैन्य शूटिंग रेंज क्षेत्र में भी यह आती हैं। नियम यह है कि सेना के शूटिंग रेंज क्षेत्र में किसी तरह का मकान का निर्माण नहीं कराया जा सकता। इससे पहले भी लावड़ रोड पर एक स्कूल का निर्माण किया गया था, जो आज तक अधूरा पड़ा हैं। इसमें कोई गतिविधियां नहीं चलती, मगर इसमें दुकानों का निर्माण कर दिया गया।

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