Friday, May 1, 2026
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महिला के उत्पीड़न की इंतहा, कट कर दिया इनवर्टर का कनेक्शन

  • रसोई से उठवा लिया गैस सिलेंडर, पुलिस ने फिर सिलेंडर दिलाया
  • मुख्य गेट को रखा जाता है लॉक, नहीं दी चॉबी
  • शिप्रा की दर्द भरी कहानी सुन पुलिस कर्मी ससुराल पक्ष के लोगों पर भड़के

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रात के 8.30 बजे थे। टीपी नगर थाना पुलिस ने गुलमोहर कॉलोनी में एंट्री की। कोठी नंबर-14 की घंटी बजाई और गेट खुलवाया। पुलिस ने पूछा कि महिला का मानसिक उत्पीड़न क्यों किया जा रहा हैं? कहां है महिला? इस तरह से मकान में बंधक बनी महिला के पास पुलिस पहुंची। ये विवाद सम्पति का है, जो शहर के बड़े बिल्डर राकेश गुप्ता से जुड़ा हैं।

बिल्डर राकेश गुप्ता के छोटे भाई संदीप अग्रवाल है तथा संदीप की पत्नी शिप्रा की सम्पत्ति को हड़पने का षड्यंत्र चल रहा हैं। यही वजह है कि बिल्डर की शह पर संदीप की पत्नी शिप्रा का मानसिक उत्पीड़न पिछले तीन माह से किया जा रहा है। संदीप अग्रवाल की दो शादी हो चुकी हैं। शिप्रा, संदीप की दूसरी पत्नी हैं। पहली पत्नी का तलाक हो चुका हैं।

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शिप्रा को घर से निकालने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र किये जा रहे हैं। पुलिस ने ससुर और जेठ का मानसिक उत्पीड़न झेल रही महिला शिप्रा से बातचीत की तो मालूम हुआ कि उसे खाना भी नहीं मिल रहा हैं। जिस कोठी नंबर-15 में शिप्रा रह रही हैं, उसका इन्वर्टर का कनेक्शन भी कट कर दिया गया है। गैस सिलेंडर भी उसकी रसोई से हटवा दिया गया है।

मुख्य गेट का लॉक लगाया गया है। पीड़ित महिला न तो घर से बाहर जा सकती है…ऐसे तमाम इंतजाम किये गए हैं। शिप्रा की दर्द भरी कहानी सुनकर पुलिस कर्मियों का आखिर दिल पसीज ही गया। पुलिस कर्मियों ने शिप्रा के पति संदीप अग्रवाल को बुलाकर फटकार लगाई तथा शिप्रा को खाना खिलाने के लिए कहा।

पुलिस के कड़े रुख को देखा तो संदीप अग्रवाल अपने बड़े भाई राकेश गुप्ता के घर से खाना लेकर पहुंचा और इसके बाद अपनी पत्नी शिप्रा को खाना खिलाया। पुलिस आयी थी महिला को घर से बाहर निकलाने, लेकिन शिप्रा के दर्द की कहानी सुनी तो पुलिस उलटे शिप्रा के ससुराल वालों पर भड़क गई।

पुलिस ने देखा कि महिला का मानसिक उत्पीड़न कर उसे घर से बाहर निकलाने के तमाम प्रयास किये जा रहे हैं। कभी इनर्वटर का कनेक्शन कट कर दिया जाता हैं। कभी रसोई से गैस सिलेंडर हटा दिया जाता हैं। पिछले एक पखवाड़े से यही चल रहा हैं। महिला के उत्पीड़न को देखते हुए पुलिस ने अपनी मौजूदगी में शिप्रा को पहले भोजन ग्रहण कराया, फिर रसोई में गैस सिलेंडर भी लगवाया।

शिप्रा की यह भी मांग है कि उसकी कोठी का मुख्य गेट लॉक कर रखा है, उसे भी खुलवाया जाए। वह घर से बाहर नहीं जा सकती। यह लॉक कोठी नंबर-15 पर लगा हुआ हैं। बराबर में कोठी नंबर-14 उसके जेठ राकेश गुप्ता की हैं। इस कोठी में ही शिप्रा और संदीप अग्रवाल एक साथ रह रहे थे। इससे पहले ये दोनों 15 दाल मंडी शहर में रहते थे। वर्तमान में गुलमोहर कॉलोनी में रह रही हैं।

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यह दर्द भरी कहानी शिप्रा की है, जो मूलरूप से गांधी कालोनी (मुजफ्फरनगर) की रहने वाली हैं। 16 वर्ष पहले उसका विवाह संदीप अग्रवाल निवासी गुलमोहर कॉलोनी के साथ हुआ था। कभी किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई, लेकिन वर्तमान में शिप्रा को उसके ससुराल पक्ष के लोग परेशान कर किसी तरह से घर से बाहर निकालने पर तूले हैं।

तमाम ऐसे प्रयास किये जा रहे है, जिससे तंग होकर शिप्रा घर छोड़कर चली जाए। अब पुलिस ने शिप्रा को आश्वस्त किया है कि उसे घर से बाहर कोई नहीं निकालेगा। घर में रहेगी तथा उसे भोजन भी मिलेगा और तमाम सुविधा भी। बता दें, राकेश गुप्ता का शहर में नाम हैं, उसके परिवार का विवाद अब सड़क पर आ गया है।

उधर, टीपी नगर थाने के इंस्पेक्टर विवेक शर्मा का कहना है कि महिला का उसके ससुराल वालों ने मानसिक उत्पीड़न किया तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। महिला को घर से जबरिया नहीं निकाला जा सकता। वह इस परिवार की विवाहिता हैं।

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