Wednesday, March 25, 2026
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पर्यावरण के लिए भी कवच साबित होगा रैपिड रेल प्रोजेक्ट

  • आरआरटीएस रैपिड रेल देश का पहला ग्रीन मोड में काम करने वाला कॉरिडोर
  • सिविल निर्माण में तेजी के बाद अब विद्युत आपूर्ति के कार्यों में भी आई तेजी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 82 किमी लंबा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर देश का प्रथम रैपिड रेल कॉरिडोर है, जो एनसीआर में परिवहन के ग्रीन मोड के रूप में काम करेगा। इलेक्ट्रिक ट्रैकशन से चलने वाली रेल आधारित परिवहन प्रणाली होने के कारण इसमें सड़क पर चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल होने वाले जीवाश्म र्इंधन की तुलना में 1/5वीं र्इंधन की खपत होगी। आरआरटीएस कॉरिडोर के 17 किमी लंबे प्राथमिकता सेक्शन में सिविल निर्माण के साथ आरआरटीएस वायडक्ट पर ओएचई के इन्स्टालेशन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी है।

ओएचई वो विद्युत उपकरण होते हैं जिसके द्वारा ट्रेन में विद्युत की आपूर्ति होती है और जिससे ट्रेन चलती है। एनसीआरटीसी देश में पहली बार 180 के डिजाइन स्पीड वाले उच्च गति व आवृति वाले आरआरटीएस का निर्माण कर रहा है जिसके लिए उपयुक्तओएचई मास्ट व अन्य उपकरण विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए है और बनाए जा रहे जो एलिवेटेड सेक्शन के लिए मौजूदा 25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम का एक उन्नत संस्करण होगा।

ओएचई कई जटिल उपकरणों से मिलकर बनता है जिसमे कांटैक्ट और कटेनरी, दो इलेक्ट्रिकल वायर होते है जो केंटीलीवर के सहारे पोल से फिक्स होते है। ओवरहेड ओएचई इन्स्टालेशन की प्रक्रिया के प्रथम फेज के तहत वायडक्ट पर लगभग 1000 मास्ट इरेक्ट या स्थापित किए जा रहे है। इन गैलवनाइज्ड आइरन से बने स्तंभों की ऊंचाई 6.5 से 8 मीटर तक होगी।

इन्हें एक दूसरे से निश्चित दूरी पर आरआरटीएस वायडक्ट पर सीधे खड़े करके फिक्स किया जा रहा है जिन पर ओएचई के अन्य हिस्सों को स्थापित किया जायेगा। वायडक्ट पर मास्ट इरेक्शन के बाद केंटीलीवर स्थापित किया जाएगा और फिर कैटनरी व कांटैक्ट वायर बिछाये जाएगे। ओएचई इस्टालेशन के बाद ट्रेन चलाने के लिए आगे की प्रक्रिया और आवश्यक टेस्टिंग की जाएगी।

साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किमी के प्राथमिकता वाले खंड को 2023 तक और 2025 तक पूर्ण कॉरिडोर को शुरू करने का लक्ष्य है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस के सम्पूर्ण कॉरिडोर में विद्युत आपूर्ति के लिए पांच रिसिविंग सब स्टेशन बनेंगे। गाजियाबाद में एक आरएसएस का निर्माण किया जा रहा है। जहां यूपीपीटीसीएल के ग्रिड से विद्युत ली जाएगी।

आरएसएस ट्रांसफार्मर की मदद से इसे 25 केवी और 33 केवी की क्षमता में बदल देगा जिससे क्रमश: आरआरटीएस ट्रेन और स्टेशन में निरंतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वर्तमान में 82 किमी लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर पर 1100 इंजीनीयर और 10000 वर्कर के अथक परिश्रम से लगभग 40 किमी फाउंडेशन व 10 किमी वायाडक्ट के साथ एलिवेटेड सेक्शन के 900 पियर पहले ही पूरे हो चुके हैं। जिसका ज्यादातर हिस्सा प्राथमिकता खंड में स्थित है।

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