- 20 गोदामों में 17 चालू, चेकबुक के आधार पर की जा रही है आपूर्ति
- रसूखदारों को मिल रहा नकद यूरिया, किसानों को यूरिया नहीं मिलने से फसलों का उत्पादन में आई कमी
जनवाणी संवाददाता |
मवाना: यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति भरपूर मात्रा का दावा सहकारी गन्ना समिति के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा हो, लेकिन धरातल पर कुछ सरकार के दावे फलीभूत नहीं हो सके हैं। किसानों में यूरिया, डीएपी एवं कीटनाशक दवाओं को लेकर हाय तौबा मची हुई है। किसान परेशान हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी समाधान नहीं हो सका है।
मवाना सहकारी गन्ना समिति के बीस गोदामो में से 17 गोदाम चालू है जिसमें से तीन निर्माणाधीन होने पर लाइसेंस जारी नहीं किये जा सके हैं। यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने से फसलों का उत्पादन में प्रबल कमी आ रही है। यूरिया शार्ट होने से किसानों की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की नाबार्ड योजना के तहत किसानों की ॠण सीमा स्वीकृति होने के बाद मवाना सहकारी गन्ना समिति एवं गोदाम से जुड़े किसानों को यूरिया-डीएपी के साथ कीटनाशक दवाओं की आपूर्ति किसानों से चेकबुक के आधार पर की जा रही है। सरकार किसानों की फसलों का बेहतर दाम दिलाने का भला ही दावा कर रही हो, लेकिन किसानों की आय दुगनी नहीं होती दिख रही है।
किसानों को फसलों का उत्पादन करने के लिए खेतों में यूरिया-डीएपी डालने के लिए समय से खाद नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते किसानों को फसलों का उत्पादन प्रबल करने के लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है तो वही गन्ना भुगतान में भी मिल प्रशासन द्वारा देरी की बात सामने आने लगी है। आरोप है कि प्रदेश सरकार ने सभी चीनी मिल प्रशासन द्वारा किसानों को 14 दिन के अंदर पूरा भुगतान करने के निर्देश जारी किये हैं, लेकिन गन्ना भुगतान करने के लिए जू नहीं रेंग रही है।
रही सही कसर यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। मवाना सहकारी गन्ना समिति समेत 20 में से 17 गोदाम चालू है। यूरिया-डीएपी खाद की भरपूर मात्रा का दावा सहकारी गन्ना समिति के अधिकारियों द्वारा भले ही किया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसानों को फसलों के उत्थान के लिए यूरिया खाद की आपूर्ति सही नहीं मिलने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
मवाना सहकारी गन्ना समिति के खाद गोदाम प्रभारी शिशुपाल सिंह ने बताया कि समिति में खाद लेने पहुंच रहे किसानों को जिला सहकारी बैंक से किसान की ॠण सीमा स्वीकृति होने के बाद यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति पर्याप्त कराई जा रही है। किसानों को नगद भुगतान पर किसी भी प्रकार से यूरिया-डीएपी का वितरण नहीं किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर किसानों ने गन्ना समिति से देहात क्षेत्र से जुड़े रसूखदारों को गोदामों पर नकद भुगतान के साथ उधार यूरिया-डीएपी खाद का वितरण कराया जा रहा है।
केंद्र एवं प्रदेश सरकार के निर्देश पर किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न होने का दम भरने वाली सरकार के सामने किसानों की आय दुगनी नहीं होती दिख रही है। यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति भरपूर मात्रा का दावा सहकारी गन्ना समिति के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर दावे फलीभूत नहीं हो सके हैं। किसानों में यूरिया, डीएपी एवं कीटनाशक दवाओं को लेकर हाय-तौबा मची हुई है।
किसान परेशान हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी समाधान नहीं हो सका है। मवाना सहकारी गन्ना समिति के 20 गोदामों में से 17 गोदाम चालू है। जिसमें से तीन निर्माणाधीन होने पर लाइसेंस जारी नहीं किये जा सके हैं। यूरिया-डीएपी खाद की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने से फसलों का उत्पादन में प्रबल कमी आ रही है। यूरिया शार्ट होने से किसानों की फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अनुबंध-छूट पर भी मिल रहा यूरिया-डीएपी
गन्ना आयुक्त के निर्देश पर सहकारी गन्ना समिति मवाना खाद गोदाम प्रभारी शिशुपाल सिंह ने बताया कि सरकार की नाबार्ड योजना एवं गन्ना आयुक्त के निर्देश पर प्रत्येक किसानों की प्रति हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल के मानक अनुसार चेकबुक के आधार पर पांच कट्टे यूरिया, तीन कट्टे डीएपी समेत कीटनाशक दवाई का वितरण भी किया जा रहा है। सहकारी गन्ना समिति के गोदाम पर 10 हजार यूरिया-डीएपी का भंडारण की क्षमता है।

