जनवाणी संवाददाता |
रुड़की: केंद्रीय विद्यालय संगठन के निर्देशानुसार, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, बी, ई, जी एवं सी, रूड़की में 15 से 21 जून तक योग सप्ताह महोत्सव का आयोजन किया गया है। प्राचार्य चन्द्र शेखर बिष्ट, उपप्राचार्या अंजू सिंह के साथ सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उत्साह के साथ इस समारोह में भाग ले रहे है।
प्रातः कालीन सभा में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्राचार्य चन्द्र शेखर बिष्ट ने कहा कि इस आयोजन का महत्व योग से होने वाले फायदे के बारे में लोगों को जागरूक करना है। योग सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योकि यह शरीर और मस्तिष्क के संबंधों में संतुलन बनाने में मदद करता है।
अगर हम नियमित रूप से योग का अभ्यास करे तो हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत और स्वस्थ रहती है। उसके साथ-साथ हमारी मांसपेशियों मे भी लचीलापन आता है। तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन बैठाने का काम योग करता है। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से योग करता है तो उसके जीवन में इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विद्यार्थियों में इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता भी बढती है। प्रतिदिन प्रातः कालीन सभा में खेल शिक्षक हरिनंद तथा योग शिक्षिका आशु भाटिया के निर्देशन में योगाभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को योग के बारे में जागरूक करने के लिए विद्यालय पुस्तकालय ब्लॉग के माध्यम से ऑनलाइन योग प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया है।
इसके अलावा विद्यार्थियों को योग के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया जिनके परिणाम निम्नांकित रहे। माध्यमिक विभाग से कक्षा 6 से 8 में चित्रकला प्रतियोगिता में हिमांशु गुप्ता (8 अ) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, सजल केसरवानी (8 ब) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा जोया खान (8 ब ) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्राथमिक विभाग से चित्रकला प्रतियोगिता में परिधि सुयाल (3 ब) प्रथम स्थान प्राप्त किया, रूद्र वर्मा (3 अ) ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, तथा लव कुमार (4 स) तथा अदीना (3 अ ) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजयी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए अपने संबोधन में उपप्राचार्या अंजू सिंह ने कहा कि योगभ्यास हम सबके दैनिक जीवन का अंग होना चाहिए, क्योकि स्वस्थ तन में स्वस्थ मन, तथा स्वस्थ मन में स्वस्थ तन निवास करता है।
स्वस्थ तन और मन के सामंजस्य के लिए योग बहुत जरुरी है। योग के अच्छे प्रभावों की वजह से भारतीय संस्कृति हमेशा ही योग को अपने जीवनचर्या का एक हिस्सा मानती आई है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही लोग योग की उपयोगिता के बारे में जागरूक थे।