शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में आचार्य गुरुदत्त आर्य का अभिनंदन
जनवाणी संवाददाता |
मोरना/शुकतीर्थ: भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द ने कहा कि ऋषि दयानन्द ने सनातन संस्कृति का गौरव बढ़ाया। महर्षि सच्चे राष्ट्रभक्त सन्यासी थे।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती कार्यक्रम के अभियान में आर्य समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज से भेंट की। इस अवसर पर वैदिक सिद्धांतों के प्रचारार्थ जीवन समर्पित करने वाले, सरल सहज व्यक्तित्व के धनी आचार्य गुरुदत्त आर्य का अभिनंदन किया गया। स्वामी जी ने कहा कि वेदों का पुर्नजागरण कर महर्षि ने सनातन संस्कृति को गौरवांवित किया।
समाज सुधार हेतु उनके कार्य अतुलनीय है। बाल विवाह पर प्रतिबंध, विधवा विवाह तथा स्त्री शिक्षा को प्रेरित कर मातृशक्ति का सम्मान बढ़ाया। महर्षि ने राष्ट्र को स्वराज की प्रेरणा दी। आजादी आंदोलन में आर्य समाज के क्रांतिवीरों का त्याग, संघर्ष और बलिदान गौरव की गाथा है।
स्वामी ओमानन्द ने कहा कि आचार्य गुरुदत्त आर्य का व्यक्तित्व सदाचरण तथा कर्तव्यपरायणता का प्रतीक है। उनका त्याग तपस्यामय गृहस्थ जीवन प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन में प्राचीन भारतीय संस्कृति का दर्शन होता है। उन्होंने गांव-गांव घूमकर लोगों को यज्ञ और धर्म से जोड़ा। विद्यार्थियों के लिये ब्रह्मचर्य तथा चरित्र निर्माण शिविर आयोजित किये। नशा, तंबाकू तथा माँसाहार के विरुद्ध चेतना जागृत की।
आर्य समाज आंनदपुरी के पूर्व प्रधान जनेश्वर प्रसाद आर्य ने कहा कि वंचित, शोषित और पिछड़े समाज में आचार्य ने वैदिक संस्कृति की चेतना जगाई। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के उप प्रधान गजेंद्र राणा, मंगत सिंह आर्य, सुधीर कुमार आर्य, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री आदि मौजूद रहे।