Friday, March 20, 2026
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8.75 लाख से छह करोड पहुंचा रोडवेज को घाटा

  • 39 करोड़ की अधिक आय के बावजूद डीजल की महंगाई
  • पुरानी बसों की मरम्मत ने लगाई निगम को बड़ी चपत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बीते वर्ष अप्रैल से नवंबर तक मेरठ परिक्षेत्र में रोडवेज को करीब पौने नौ लाख का घाटा उठाना पड़ा, जो इस साल छह करोड़ पांच लाख तक इतना बढ़ गया कि देखकर अधिकारियों को जवाब देना भारी पड़ रहा है। दोनों वर्षों के इन आठ माह की तुलनात्मक आय देखी जाए, तो इसमें करीब 38 करोड़ 95 लाख 75 हजार 576 रुपये की वृद्धि हुई है। पिछले साल अप्रैल से नवंबर माह के अंत तक मेरठ परिक्षेत्र के पांचों डिपो मेरठ, सोहराब गेट, भैंसाली, बड़ौत और गढ़ में एक अरब 75 करोड़ 94 लाख 97 हजार 491 रुपये की आय अर्जित की गई।

जबकि इस दौरान एक अरब 76 करोड़ तीन लाख 70 हजार 109 रुपये खर्च करते हुए आठ लाख 72 हजार 618 रुपये का घाटा दर्ज किया गया। वहीं इस साल इन आठ महीनों में आय बढ़कर दो अरब सात करोड़ 93 लाख 92 हजार 929 रुपये हुई, लेकिन इस बार खर्च ने तमाम रिकार्ड तोड़ दिए। नगर निगम कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इस अवधि में दो अरब 13 करोड़ 99 लाख 45 हजार 685 रुपये का खर्च हुआ। जिसके चलते निगम को छह करोड़ 55 लाख 52 हजार 756 रुपये का घाटा पड़ा।

आय के स्रोत की अगर बात की जाए, तो वर्ष 2021 के अप्रैल से नवंबर तक आठ महीनों में एक अरब आठ करोड़ 93 लाख छह हजार 965 रुपये निगम और 66 करोड़ 42 लाख 19 हजार 228 रुपये अनुबंधित बसों से अर्जित किए गए। जबकि वर्तमान साल के इन्हीं आठ महीनों में एक अरब 30 करोड़ 27 लाख 56 हजार 387 रुपये निगम और 76 करोड़ 74 लाख 83 हजार 45 रुपये अनुबंधित बसों से आय प्राप्त हुई।

इस अवधि में वर्ष 2022 में करीब 39 करोड़ रुपये की अधिक आय के बावजूद मेरठ परिक्षेत्र के पांचों डिपो में छह करोड़ पांच लाख 52 हजार 756 रुपये का घाटा हुआ है। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि वेतन और भत्ते आदि में जहां बीते वर्ष आठ माह में 49 करोड़ नौ लाख 77 हजार 491 रुपये खर्च हुए, वहीं इस वर्ष आठ माह के दौरान एक करोड़ 89 लाख 56 हजार 554 रुपये अधिक व्यय हुए।

घाटे के प्रमुख कारण के बारे में विभाग के अधिकारी कहते हैं कि डीजल और पेट्रोल के दाम में भारी वृद्धि के चलते 2021 के आठ महीनों में 41 करोड़ 93 लाख 43 हजार 128 रुपये के मुकाबले इस वर्ष आठ माह की अवधि में 58 करोड़ 41 लाख 98 हजार 329 रुपये डीजल आदि में खर्च हुए हैं।

जो पिछले साल के मुकाबले 16 करोड़ 48 लाख 55 हजार 201 रुपये अधिक है। वहीं बसों के मेंटीनेंस और अन्य मद में जहां पिछले साल 32 करोड़ 56 लाख 370 रुपये के मुकाबले इस साल के आठ महीनों में 38 करोड़ 81 लाख 74 हजार 282 रुपये खर्च हो गए हैं। यह राशि भी पिछले साल के मुकाबले छह करोड़ 25 लाख 73 हजार 912 रुपये अधिक है।

शासन की मंशा है कि कम खर्च में यात्रियों को अधिक सुविधा दी जाए, इसको ध्यान में रखते हुए बसों का किराया कई साल से नहीं बढ़ाया गया है। जबकि इस अवधि में डीजल और पार्ट्स आदि के दाम काफी बढ़ चुके हैं। घाटे को कम करने के लिए बसों में यात्रियों की संख्या अधिक किए जाने पर फोकस किया जा रहा है।

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इसी के तहत आदेश जारी किया गया है कि अगर 25 से कम यात्री होंगे, तो बसों का संचालन स्टार्टिंग पॉइंट से न किया जाए। ऐसी स्थिति में यात्रियों को दूसरी बस में बैठाया जा सकता है। इसके अलावा घाटा कम करने के लिए निगम के अधिकारी कार्ययोजना बनाने में लगे हैं। -केके शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपी रोडवेज, मेरठ

अब स्मार्ट एमएसटी कार्ड जारी करेगा एमसीटीएसएल

सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले दिनों में मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. यानि एमसीटीएसएल के अंतर्गत संचालित सिटी बसों में स्मार्ट एमएसटी कार्ड बनाए जाएंगे। जिनका प्रयोग किसी भी मार्ग की सिटी बस में किया जा सकेगा। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह स्मार्ट कार्ड दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर काम करेगा। यानि जितनी दूरी तक यात्रा की जाएगी, उतने का किराया कार्ड से कट जाएगा। इस कार्ड का लाभ यह होगा कि एमएसटी की भांति इसमें दी गई राशि को टॉपअप कर दिया जाएगा।

इसे यूं समझा जा सकता है कि मसलन एमएसटी में 18 दिन का किराया लेकर 30 दिन यात्रा कर सकते हैं, इसी प्रकार स्मार्ट कार्ड में 30 दिन के रुपये बढ़ाकर दे दिए जाएंगे। खास बात यह होगी कि इस कार्ड का प्रयोग सिटी बस सेवा के किसी भी मार्ग पर करके यात्रा की जा सकेगी।

इसका दूसरा लाभ यह भी होगा कि एक ओर एमएसटी निश्चित समयावधि तक प्रयोग होती है, जबकि स्मार्ट कार्ड की अवधि इससे अलग होगी। उदाहरण के तौर पर 500 रुपये के स्मार्ट कार्ड में अगर 700 रुपये मिले, तो उन्हें कई महीने तक प्रयोग किया जा सकता है।

आयु पूरी कर चुकीं 23 बसें चिन्हित, 21 दूसरे क्षेत्रों में भेजी गर्इं

मेरठ परिक्षेत्र में 23 ऐसी बसें चिन्हित की गई हैं, जिनकी आयु एनसीआर क्षेत्र के नियमों के अनुसार पूरी हो चुकी है। इनमें से 21 बसों को दूसरे डिपो में भेज दिया गया है। वहीं आठ बसें कंडम स्थिति की पाई गई हैं, इनमें से पांच कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण नीलाम नहीं की जा सकेंगी।

जबकि तीन को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आरएम केके शर्मा ने बताया कि गुरुवार को एमडी स्तर से वीसी के जरिये निर्देश जारी किए गए। जिसमें मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अच्छी स्थिति की बसों को ही मार्ग पर लाया जाएगा।

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