Saturday, March 28, 2026
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गुलाब की खेती दे भरपूर मुनाफा

KHETIBADI


फूलों की खेती में गुलाब की खेती बड़े मुनाफे का सौदा है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो बहुत अच्छे परिणाम सामने आते हैं।

जलवायु

गुलाब की खेती के लिए मध्यम तापक्रम वाली जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए दिन का तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस तथा रात का 12-14 डिग्री सेल्सियस उत्तम होता है। इसकी खेती के लिए दोमट तथा अधिक कार्बनिक पदार्थ वाली भूमि होनी चाहिए। भूमि का पीएच मान 5.3 से 6.5 तक होना चाहिए।

प्रजातियां

  • संकर: क्रिमसन ग्लोरी, मिस्टर लिंकन, लव, जान एफ केनडी, जवाहर मृणालिनी, पे्रजिडेंट, राधा कृष्णन, फर्स्ट लव, अपोलो, पूसा सोनिया, गंगा, टाटा सेटनरी, आर्किड, सुपर स्टार, अमेरिकन हेरिटेज आदि।

  • पाली एन्था : अंजनी, रश्मि, नर्तकी, प्रीति स्वाती।

  • फ्लोरीबंडा : बंजारन, देहली प्रिंसेज, डिम्पल, चंद्रमा, सदाबहार, सोनोरा, नीलांबरी, करिश्मा, सूर्य किरण आदि।

  • गैंडी फ्लोरा : क्वीन एलिजाबेथ, मान्टे जुमा आदि।

  • मिनीपेचर : ब्यूटी सीक्रेट, रेड फ्लश, पुश्कला, बेबी गोल्ड स्टार, सिल्वर टिप्स आदि।

  • लता गुलाब : काकटेल, ब्लैक ब्वाय, लैमार्क, पिंक मैराडोन, मैरिकल नील आदि।

पौध तैयार करना

जंगली गुलाब के ऊपर ‘टी’ बडिंंग से पौध तैयार होती है। जंगली गुलाब की कलम जून-जुलाई में क्यारियों में लगभग 15 सेमी. की दूरी पर लगा दी जाती है और इनमें पत्तियां फूट जाती हैं। नवंबर-दिसंबर में चाकू की सहायता से फुटाव आई टहनियों पर से कांटे साफ कर दिए जाते हैं। जनवरी में अच्छी किस्म के गुलाब से टहनी लेकर ‘टी’ आकार कालिका निकालकर जंगली गुलाब के ऊपर लगाकर पालीथिन से कसकर बांध देते हैं। जुलाई-अगस्त में पौध तैयार हो जाती है।

ले आउट और तैयारी

क्यारियों का आकार 5 गुणा 2 मीटर रखा जा सकता है। दो क्यारियों के बीच आधा मीटर स्थान छोड़ें। क्यारियों को अप्रैल-मई के महीने में एक मीटर की गहराई तक खोदें और 15-20 दिन तक खुला छोड़ दें। खुदी क्यारियों में 30 सेमी. तक सूखी पत्तियां डाल दें। साथ ही गोबर की सड़ी खाद एक महीने पहले खेत (क्यारी) में डाल दें। इसके बाद क्यारियों को पानी से भर दें। दीमक से बचाव के लिए फालीडाल धूल या कार्बाेफ्यूरान 3 जी. का प्रयोग करें।

लगभग 10-15 दिन बाद ओट आने पर इन्हीं क्यारियों में कतार बनाते हुए पौधे से पौधे व लाइन से लाइन की दूरी 30 गुणा 60 सेमी. रखी जाती है, इसको और भी कम किया जा सकता है। अर्थात पौधे व लाइन की दूरी 30 सेमी. तथा दो लाइन के पश्चात तीसरी लाइन की दूरी 60 सेमी. रखा जाती है।

पौध रोपाई

पौधशाला से सावधानीपूर्वक पौध खोदकर उत्तर भारत के मैदानी भागों में सितंबर-अक्टूबर में पौध की रोपाई करनी चाहिए। खोदे गए पिंडी से लिपटी घास-फूस हटा देें और ध्यान दें कि कलिकायन वाला भाग रोपाई के समय भूमि की सतह से 15 सेमी. ऊंचा रहे। पौध लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करें।

सिंचाई-कटिंग

आवश्यकतानुसार गर्मी में 5-7 बाद और सर्दी में 10-12 दिन बाद सिंचाई करें। काट-छांट के लिए प्रदेश के मैदानी भागों में अक्टूबर महीने का दूसरा सप्ताह उपयुक्त होता है, बशर्ते कांट-छांट के समय वर्षा न हो। पौधों में 3-5 मुख्य टहनियों को 30-45 सेमी. लंबी रखकर काट दिया जाता है। जहां पर काटा जाए, वहां पर आंख बाहर की तरफ हो।

फूलों की कटाई और देखरेख

सफेद, लाल, गुलाबी रंग के फूल अधखुली पंखुड़ियों में जब ऊपरी पंखुड़ी नीचे की ओर मुड़ना शुरू हो तब काटना ठीक रहता है। फूलों को काटते समय एक या दो पत्तियाँ टहनी पर छोड़ देनी चाहिए जिससे पौधों को वहां से फिर बढ़कर मिलती है।

फूल काटते समय पानी की बाल्टी साथ रखें जिससे फूलों को काटने के तुरन्त बाद पानी में रखा जा सकें। बाल्टी में कम से कम 10 सेमी पानी अवश्य होना चाहिए जिससे फूलों की डंडी अच्छी तरह से भीग जाये। फूलों को कम से कम 3 घंटे पानी में रखने के बाद ही उनको ग्रेडिंग के लिए निकालना चाहिए। यदि ग्रेडिंंग देर से करनी हो तो फिर फूलों को कोल्ड स्टोरेज में रखना चाहिए। जिसका तापक्रम-1-3 से. होना चाहिए।

कीट तथा नियंत्रण व उपचार

पाउडरी मिल्ड्यू रोग (खर्रा): फफूंदी जनित इस रोग में पत्तियों, तनों तथा कलियों पर सफेद चूर्ण फैला दिखाई देता है। गुलाब की कंटाई-छंटाई के समय सभी पत्तियों को काट दें, जिससे संक्रमण का स्रोत नष्ट हो जाए। रोेग रोकथाम हेतु घुलनशील गंधक (1 मिली. प्रति लीटर पानी में) का घोल बनाकर 15 दिन के अंतर पर दो छिड़काव दवाओं को अदल-बदल कर करें।

डाईबैक या उल्टा सूखा रोग: इस रोग का प्रकोप वर्षा के बाद से प्रारंभ होकर दिसंबर के अंत तक होता है। इसमें टहनियां ऊपर से शुरू होकर नीचे की ओर सूखना शुरू कर देती हैं। पौधे का तना काला पड़कर मर जाता है। प्रभावित भाग को काटकर जला दें तथा कटे भाग पर चौबटिया पेस्ट (4 भाग कपर कार्बेनेट व 4 भाग रेडलेट व 5 भाग अलसी का तेल) या बोर्डाे पेस्ट का लेप कर दें। 50 प्रतिशत कॉपर आॅक्सीक्लोराइड को 3 ग्राम प्रति ली. पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

माहू (एफिड): इसके उपचार हेतु कीट दिखाई देते ही तुरंत डाईमिथोएट 1.5 मिली/लीटर पानी में अथवा मोनोक्रोटेफास 1 मिली/लीटर पानी में घोलकर 2-3 छिड़काव करें। तेज हवा के समय छिड़काव न करें। ं जिसससे सम्पूर्ण पौधा सूखकर नष्ट हो जाता है।


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