जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र गुरमितकल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS को 1 नवंबर (शुक्रवार) को पथ संचलन निकालने की अनुमति मिल गई है। यादगीर जिला प्रशासन ने बुधवार को आदेश जारी करते हुए इस कार्यक्रम के आयोजन की मंजूरी दी है। यह पथ संचलन आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
हालांकि प्रशासन ने इस अनुमति के साथ 10 सख्त शर्तें भी लगाई हैं, ताकि कानून-व्यवस्था और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखा जा सके।
प्रशासन की शर्तें क्या हैं?
आरएसएस स्वयंसेवकों को सिर्फ तय मार्ग से गुजरने की अनुमति होगी।
किसी धर्म या जाति की भावना को आहत करने वाले नारे या भाषण की अनुमति नहीं होगी।
शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि पर रोक रहेगी।
जुलूस के दौरान सड़कें नहीं रोकी जाएंगी और दुकानों को जबरन बंद नहीं कराया जाएगा।
किसी स्वयंसेवक को घातक हथियार या लाठी (डंडा) लेकर चलने की इजाजत नहीं होगी।
किसी भी नियम के उल्लंघन पर आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हुए नुकसान की भरपाई आयोजकों को ही करनी होगी।
पथ संचलन का पूरा मार्ग पुलिस निगरानी में रहेगा।
आयोजकों को पूर्व निर्धारित समय सीमा के भीतर ही कार्यक्रम समाप्त करना होगा।
किसी भी प्रकार की राजनीतिक नारेबाजी या प्रतीक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
तय मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था
आरएसएस का पथ संचलन सम्राट सर्कल से शुरू होकर
एपीएमसी सर्कल – हनुमान मंदिर – मराठवाड़ी – पुलिस स्टेशन रोड – मिलन चौक – सिहिनेहरू बावी मार्केट मेन रोड से गुजरते हुए राम नगर में समाप्त होगा।
पूरे मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती रहेगी और कानून-व्यवस्था पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन निगरानी की भी व्यवस्था की गई है।
खरगे परिवार का विरोध
इस आयोजन को लेकर खरगे परिवार पहले से ही विरोध में है। राज्य मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि “आरएसएस सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर शाखाएं लगाकर बच्चों और युवाओं में नकारात्मक विचार फैला रहा है।”
इसके बाद राज्य कैबिनेट ने निर्णय लिया कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी संगठन को कार्यक्रम करने से पहले प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होगा। हाल में कुछ सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस के आयोजनों में भाग लेने पर निलंबित भी किया गया था।
गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खरगे स्वयं गुरमितकल से आठ बार विधायक रह चुके हैं और यह इलाका कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है।
लाठी की अनुमति पर अब भी संशय
हालांकि पथ संचलन को अनुमति मिल गई है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि आरएसएस स्वयंसेवकों को पारंपरिक लाठी लेकर चलने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।
प्रशासन ने इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
ऐतिहासिक अवसर पर नजरें टिकीं
प्रशासनिक अड़चनों और राजनीतिक विवादों के बावजूद आरएसएस को आखिरकार इस ऐतिहासिक पथ संचलन की मंजूरी मिल गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कार्यक्रम कितनी शांति और अनुशासन के साथ संपन्न होता है।

