Tuesday, April 14, 2026
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नियम ताक पर खुलेआम किया जा रहा नियमों का उल्लंघन

  • स्विमिंग पूलों की बाढ़, जलदोहन हो रहा बेहिसाब, सुविधाओं के नाम पर स्विमिंग पुल में नियम जीरो
  • आने वाले लोगों की दी जाने वाली सुविधाओं का कोई अता-पता नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मवाना: जिले में शहर से लेकर देहात तक नियमों को ताक पर रखकर कुकुरमुत्तों की तरह स्विमिंग पूल बन गए हैं। बिना एनओसी के चल रहे इन पूल के संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा इन पूलों में रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी बिना एनओसी चल रहे स्विमिंग पूल को बंद कराने की बात कह रहे हैं। गर्मी में ये पूल ठंडक का अहसास भले ही कराते हों, लेकिन इससे हो रहे पानी की बेहिसाब बर्बादी से भूगर्भीय जल को काफी नुकसान हो रहा है। एक स्विमिंग पूल में औसतन हजारों लीटर पानी जमा होता है। जिसे दिन में दो बार भरा जाता है। पूल को खाली करने के लिए इस पानी को नालियों में बहा दिया जाता है। कुल मिलाकर इन पूलों से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।

बेहतरीन साज-सज्जा और सुविधाओं के नाम पर तमाम स्विमिंग पूल (तरणताल) तहसील क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। कई स्विमिंग पूल बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। मानकों को दरकिनार कर लोगों से सुविधाओं के नाम पर प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है। निजी स्विमिंग पूल में रोजाना सैकड़ों लोग स्विमिंग के लिए जाते हैं। नियम-कानून को ताक पर संचालन हो रहा है स्विमिंग पूलों में न तो सुरक्षा के संसाधन हैं और न ही निगरानी हो रही है।

भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए लोग स्विमिंग पूल में तैरने पर धनराशि खर्च करते हैं, लेकिन तहसील क्षेत्र में पैसा खर्च करने के बावजूद लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालात ये हैं कि पानी की सफाई, लाइफ गार्ड और दुर्घटना होने पर उपचार की व्यवस्था भी यहां नहीं है। स्विमिंग पूल संचालन के कई मानकों के बारे में संचालकों को जानकारी तक नहीं है। हद तो तब है जब अधिकांश स्विमिंग पूलों पर किसी विभाग की एनओसी तक नहीं है।

अत्यधिक दोहन पर प्रशासन ने मूंदी आंखें

भूगर्भीय जल दोहन के खिलाफ आए दिन प्रशासन की ओर से जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं, लेकिन इन स्विमिंग पूलों पर प्रशासन मौन हैं। नियमानुसार भूगर्भीय जल का दोहन करने वालों को वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाना जरूरी है, लेकिन किसी भी पूल संचालक ने ऐसा सिस्टम लगाने की जहमत नहीं उठाई है, जिससे पानी का रिसाइकिलिंग किया जा सके।

ये होनी चाहिए सुविधाएं

स्विमिंग पूल का संचालन करने के लिए तमाम मानकों को पूरा करने के साथ ही एक एनआइएस (राष्ट्रीय खेल संस्था) कोच के साथ ही दो लाइफ गार्ड, दो आॅक्सीजन सिलेंडर, दो कृत्रिम सांस यंत्र के साथ भूगर्भ जल संरक्षण विभाग, विकास प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फायर विभाग, क्रीड़ा विभाग आदि की एनओसी होने के साथ पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे चलाया जाए, पानी को साफ रखने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बीमारियों से बचाव होता है, लेकिन तहसील भर में चल रहे तमाम स्विमिंग पूलों में खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है।

मोटी कमाई का जरिया बने पूल

भीषण गर्मी में स्विमिंग पूल युवाओं के लिए बेहतर विकल्प बन रहे है। ऐसे में पूल संचालक इस मौसम में अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। 40 से 60 रुपये प्रति घंटा की दर से पूल में प्रवेश दे रहे हैं। जबकि कुछ पूलों में दो हजार रुपये में मासिक सदस्यता भी दी जा रही है। इसके लिए अलग से कोई पार्टी का आयोजन करना हो तो उसके लिए भी पूल बुक किया जा रहा है।

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