नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू परंपरा में सकट चौथ का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह व्रत हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि शाम के समय गणपति पूजन और चंद्रमा दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलने से संतान को लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी प्रकार के संरक्षण का आशीर्वाद मिलता है।
यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान के सभी संकटों से रक्षा के लिए रखती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया सकट चौथ व्रत अत्यंत शुभ फल देने वाला होता है। ऐसे में आइए जानते हैं सकट चौथ की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा सामग्री, कथा, मंत्र और चंद्रोदय का समय। साथ ही जानेंगे कि इस व्रत का पारण कब किया जाएगा।
सकट चौथ व्रत कब होगा?
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी, मंगलवार को सुबह 8:01 बजे होगी, और यह तिथि 7 जनवरी, बुधवार को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी तिथि में चंद्र दर्शन के महत्व को ध्यान में रखते हुए, 6 जनवरी, मंगलवार को ही सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस तिथि को वक्रतुंड चतुर्थी भी कहा जाता है।
सुबह की पूजा का शुभ समय
लाभ चौघड़िया: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
अमृत चौघड़िया: दोपहर 12:27 बजे से 1:45 बजे तक
शाम की पूजा का शुभ समय
सकट चौथ के दिन प्रदोष काल में भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल शाम 4:54 बजे लेकर 6:24 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना उत्तम माना गया है।
व्रत की पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
घर के पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और गंगाजल से स्थान को शुद्ध करें।
इसके बाद व्रत का संकल्प लेते हुए “गणपतिप्रीतये संकष्टचतुर्थीव्रतं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करें।
भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, शमी पत्र, चंदन अर्पित करें। साथ ही फल, मिठाई और तिल से बने व्यंजन जरूर चढ़ाएं।
दीपक जलाकर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और विधिपूर्वक गणेश जी की आरती करें।
पूजा के बाद तिल और गुड़ का भोग अर्पित करें।
शाम के समय चंद्रमा के दर्शन कर उसे अर्घ्य दें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
इसके बाद व्रत खोलें और प्रसाद का वितरण करें।
सकट चौथ के दिन व्रत कथा का पाठ करना भी आवश्यक माना गया है, जिससे भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजा सामग्री
मान्यता है कि कुछ आवश्यक पूजन सामग्री के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा से पहले सभी वस्तुओं को एकत्र कर लेना चाहिए, जैसे जल, सुपारी, जनेऊ, लौंग, चौकी, फूल, गंगाजल, देसी घी, तिल के लड्डू, फल, कलश, दीपक, दूध, मोदक, धूप, गणेश जी की प्रतिमा।
सकट चौथ पर चंद्रोदय का समय
सकट चौथ के दिन चंद्रमा का उदय रात 08:54 बजे होगा। इसी समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गणेश मंत्र
- ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
- ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्
- ‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

