Saturday, March 28, 2026
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संजीवनी की तलाश में छात्र राजनीति

छात्रसंघ चुनाव न होने और स्वार्थ हित में हाशिए पर छात्र राजनीति

विशाल भटनागर |

मेरठ: जिस छात्र राजनीति से छात्रों की समस्या को सुलझाते हुए छात्रनेता देश की सक्रिय राजनीति में अहम् योगदान निभाते थे। अब उसी छात्र राजनीति को संजीवनी की आवश्यकता पड़ रही है। क्योंकि छात्रसंघ चुनाव न होने के कारण कहीं ना कही पश्चिम उत्तर प्रदेश में छात्र राजनीति का स्तर पहले के मुकाबले काफी कमजोर होता जा रहा हैं। हालात यह है, छात्रनेताओं की सक्रियता जमीनी स्तर पर कम और सोशल मीडिया पर ज्यादा दिखाई देती हैं।

छात्र पंचायत से छात्र राजनीति को जीवित करने की कवायद

वहीं कुछ वरिष्ठ एवं जूनियर छात्रनेता छात्र राजनीति को जीवित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने छात्र पंचायत का आयोजन करना शुरु कर दिया है। पहली छात्र पंचायत का आयोजन सीसीएसयू में हुआ था, जिसमें विभिन्न मुद्दों को उठाया गया। हालांकि उसमें छात्रनेताओं की संख्या काफी कम रही। उसके बावजूद आयोजकों ने इस प्रयास को आगे बढ़ाते हुए मोदीनगर में दूसरी छात्रपंचायत आयोजन करने का निर्णय लिया है।

उसमें छात्रों के मुद्दों के साथ-साथ दीक्षांत समारोह के समय सपा एवं छात्रसंभा से जुड़े जिलााध्यक्ष अंशु मलिक, हैविन खान, आनंद प्रकाश सिद्धार्थ एवं अन्य छानेताओं में शान मोहम्मद को पुलिस प्रशासन द्वारा नजरबंद किए जाने पर मंथन किया जाएगा। क्योकि इन छात्रनेताओं का कहना है कि यह सभी राज्यपाल एवं डिप्टी सीएम को छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए शांति पूर्ण तरीकि सक ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन उससे पहले इस प्रकार रोककर छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया है। ऐसे में आने वाले समय में देखना होगा कि इन प्रयास से छात्र राजनीति को संजीवनी मिल पाएंगी या नहीं।

10 13सपा छात्रसंभा जिलाध्यक्ष अंशु मलिक का कहना है कि पहले छात्रनेताओं की बात को तरजीह देते हुए छात्रों की समस्या का निवारण किया जाता था, लेकिन अब छात्रों की आवाज को उठाने वाले छात्रनेताओं पर ही कार्रवाई की जाती है। छात्रसंघ चुनाव न होना भी अहम भाग है। ऐसे में प्रयास है कि नए छात्रों को छात्रराजनीति से जोड़ते हुए छात्रों की आवाज को बुलंद किया जाएं।

12 13रालोद छात्रसंभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव बालियान ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार छात्रराजनीति को समाप्त करना चाहती है। क्योंंकि छात्रनेता सरकार की गलत नीतियों का खुलकर विरोध करते हैं, इसी वजह से सरकार अब छात्रसंघ चुनाव को तरजीह नहीं दे रही। जबकि जब भाजपा विपक्ष में होेती थी तो छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग करती थी।

13 14एबीवीपी प्रांत कार्यालय प्रमुख उत्तम सेनी ने कहा कि छात्रराजनीति का वर्चस्व पूर्व के वर्षों के भांति ही कायम हैं। जिसमें चाहे छात्रों के मुद्दों हो या फिर अन्य समस्याएं सभी को त्वरित उठाया जाता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रत्येक कार्यकर्ता छात्रों के हितों के लिए सबसे आगे खड़ा रहता है।

14 16एनएसयूआई जिला अध्यक्ष नितीश भारद्वाज ने कहा कि नए युवाओं को छात्रराजनीति में तरजीह देते हुए छात्रसंघ चुनाव कराने चाहिए। जिससे कि छात्र-छात्राएं अपनी आवाज को बुंलद करने के लिए अपने प्रतिनिधि छात्रनेता का चयन कर सकें। साथ ही छात्रों के मुद्दों पर सभी छात्र इकाइयों को एक मंच पर आकर आवाज को उठाना चाहिए। तभी छात्रराजनीति अपने पुराने वर्चस्व में आएगी।

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