- कॅरियर के लिए तकनीकी कोर्स में बढ़े दाखिले
- मोटर मैकेनिक, फिटर, टर्नर, बिजली मैकेनिक और लाइनमैन बनने की ओर बढ़ा रहीं कदम
- सिलाई-कढ़ाई में नहीं अब रुचि, कठिन ट्रेड में हर साल बढ़ रही युवतियों की संख्या
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: युवतियों का फोकस कॅरियर पर है। पुरुष का क्षेत्र समझे जाने वाले काम में यदि अवसर है तो युवतियां कार्य करने में हिचक नहीं रहीं। सिलाई-कढ़ाई नहीं अब बेटियां फिटर और मैकेनिक बनना चाहती हैं। आईटीआई संस्थानों में पिछले तीन साल में प्रवेश के आंकड़े यह बताते हैं।
आईटीआई संस्थानों की एक यूनिट में कुल 20 प्रशिक्षणार्थी में दो या तीन युवतियां ही होती थीं। पिछले तीन साल में यह संख्या दोगुना से ज्यादा हो गई है। इसके विपरीत सिलाई कोर्स में युवतियों की संख्या कम हुई है। जबकि पहले इस कोर्स में सभी सीटें फुल रहती थीं। यहां की बेटियां अपनी तकदीर अपने दम पर लिख रही हैं।
कॅरियर बनाने पर है फोकस
आईटीआई संस्थानों के शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी कोर्स में युवतियों के दाखिले बढ़ने की वजह कॅरियर है। सिलाई, कढ़ाई से ज्यादा युवतियों को फिटर, इलेक्ट्रिीशियन, टर्नर आदि ट्रेड में भविष्य नजर आ रहा है। अनेक युवतियों ने आईटीआई करने के बाद नौकरी ज्वाइन की है।
रेलवे से लेकर निजी कंपनी तक में युवतियों को नौकरी मिली हैं। इसी का प्रभाव है कि सिलाई, कढ़ाई में रुझान कम हुआ है और तकनीकी ट्रेड में बढ़ा है। आईटीआई संस्थान के अध्यापकों ने बताया कि जिन ट्रेडस में पहले युवतियों की संख्या एक या दो होती थी, अब हर साल उनमें छात्रों के साथ छात्राओं की संख्या बढ़ रही है।
चुनौतियां अपार, लेकिन नहीं मानी हार
इतने पैसे नहीं कि महंगी पढ़ाई कर पाती। गांव से रोजाना मेरठ बस से आकर पढ़ाई पूरी की और आईटीआई में प्रवेश ले लिया। मैं अपनी क्लास में अकेली युवती थी। युवक मुझ पर हंसते थे, मजाक बनाते थे, लेकिन मुझे अपना कॅरियर बनाना था, इसलिए उनके मजाक को कभी ध्यान नहीं दिया। ट्रेनिंग के दौरान कई बार हाथ जले, काले भी हुए, हाथों में दर्द भी हुआ, लेकिन मेरे लक्ष्य के आगे सब फीके पड़ गए। -दिव्या मित्तल, मैकेनिक
नौकरी के लिए बन रही फिटर
सिलाई और कढ़ाई तो घर में भी सीखी जा सकती है। इससे नौकरी भी नहीं मिलेगी। आगे बढ़ने के लिए ही फिटर का कोर्स कर रही हूं। प्रशिक्षु तकनीकी पढ़ाई का महत्व ज्यादा है। मैं नौकरी करना चाहती हूं। फिटर का कोर्स कर सरकारी अथवा गैर सरकारी क्षेत्र में नौकरी मिल सकती है। -अंजू, फिटर प्रशिक्षु
भविष्य सुरक्षित करना है मुझे
भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से मशीनिस्ट का कोर्स कर रही हूं। महज सिलाई, कढ़ाई सीखने से नौकरी नहीं मिलेगी। तरक्की नहीं हो सकती है। छात्राएं आम स्वरोजगार के अलावा मुश्किल स्वरोजगार पाठ्यक्रमों में भी अपनी धमक जमा रही हैं।-हिना, मशीनिस्ट प्रशिक्षु
पहले लगता था डर अब आता है मजा
परतापुर आईटीआई के टर्नर ट्रेड में ट्रेनिंग ले रही छात्रा की र्इंटों से कलपुर्जे बनाती हैं। शुरू में लोहे को काटने में हाथों में दर्द हुआ। मशीन में हाथ आने का भी डर लगा, लेकिन अब इसी काम में मजा आने लगा है। -आरती छात्रा
नौकरी करके सिविल सर्विस की करूंगी तैयारी
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर देश सेवा करना चाहती हूं, लेकिन कोचिंग करने के लिए इतने पैसे नहीं है। इसलिए आईटीआई में तकनीकी क्षेत्र को चुना। तकनीकी क्षेत्र में युवतियों के लिए अपार संभावनाएं हैं। -अन्नू, मशीनिस्ट
तकनीकी शिक्षा में बेटियां क्यों रहे पीछे?
मशीन मैकेनिक ट्रेड में मशीनों के कलपुर्जे बनाने का प्रशिक्षण ले रही अपूर्वा गंगानगर रोजाना साइकिल से आईटीआई विभाग आती हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। पिता किसान हैं और माता गृहिणी हैं। अपूर्वा बताती हैं कि घर का खर्चा बड़ी मुश्किल से चलता है। हम चार-भाई बहन हैं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी है। पूरी मेहनत और लगन के साथ मैं प्रशिक्षण ले रही हूं। एक दिन मैं भी अपने माता-पिता का नाम रोशन करूंगी। -अपूर्वा, मशीन मैकेनिक
करंट के झटके हमारा क्या बिगाड़ेंगे?
परतापुर आईटीआई के इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में रोजाना बिजली के झटकोें से जूझने का हुनर सीख रहीं शिवांगी इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि अब उन्हें करंट से डर नहीं लगता। शिवांगी कहती है कि इस ट्रेड में युवतियों को अच्छी नौकरी मिल जाती है, इसलिए मैंने यह लाइन चुनी। मुझे पूरी उम्मीद है कि एक दिन जरूर मैं कामयाब होगी। -शिवांगी, इलेक्ट्रिशियन

