जनवाणी संवाददाता |
शेरकोट: शहर इमाम मौलाना रफीक कासमी सहाब के शव को गमगीन माहौल के बीच उनका दफीना कर दिया गया। वहीं उनके बहारी, नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों ने उनके जनाजे में शिरकत की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर इमाम मौलाना रफीक अहमद कासमी (75 वर्ष) का सोमवार की रात उस समय ह्रदय गति रुकने से देहांत हो गया था जब वे असर की नमाज पढ़ाने के लिये घर से मस्जिद जाने को तैयार हो रहे थे तभी अचानक पीछे की ओर गिर पड़े। उनके देहांत की खबर सुनते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ पड़ी तथा शहरवासी उनके अन्तिम दीदार को मोहल्ला काजी सराय पहुंचने लगे।
शहर इमाम हर नमाज के बाद मुल्क की खुशहाली व अमनो अमान की दुआ करते थे साथ ही लोगों को भाईचारा कायम रखने के लिये भी नसीहत देते रहते थे। उनके जनाजे में मुफ्ती उवैश, अकरम नगीना जामा मस्जिद इमाम, मुफ्ती अबरार उल रहमान, मुफ्ती यासीन, कारी यामीन, कारी शहजाद, कुंवर कासिफ विकार, बसपा नेता हाजी कमाल, प्रधानाचार्य शमशाद हुसैन, मौलाना उबैदुर रहमान, पूर्व मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान, पूर्व चेयरमैन कमरुल इस्लाम, अली मस्जिद इमाम मौलाना अब्दुल्लाह, गुफरान राजा, कारी इंतजार, मुफ्ती दानिश, हाफिज याकूब, अब्दुल रऊफ ठेकेदार, काजी समीम, मुफ्ती जाहिद, डॉक्टर शाहनवाज, सभासद अफजाल अहमद, सभासद बबलू कप्तान, हाफिज कमर, दिनेश राणा, नरेंद्र यादव, हकीम ताजुद्दीन, दिलशाद अहमद, शेख नजरुल इस्लाम, अशरफ कबाड़ी, डॉक्टर हामिद, डॉ रिजवान अहमद, तस्लीम अहमद, मास्टर एहतेशाम, गुलज़ार राईन, असलम कुरेशी, शेख अकरम, हजारों की संख्या में लोग रहे।

