जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: नशीले कफ सिरप की तस्करी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल ने रांची स्थित शैली ट्रेडर्स के माध्यम से अकेले 2.24 करोड़ सिरप की बोतलें बेचीं। दोनों ने मिलकर 500 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत के सिरप की तस्करी की। सूत्रों के अनुसार, नेताओं और माफिया के संरक्षण की वजह से शुभम जायसवाल दुबई भागने में सफल हो गया है। ईडी अब उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की योजना बना रहा है।
ईडी को हाल ही में शुभम जायसवाल और उसके चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। शुभम के पुश्तैनी घर से बरामद दस्तावेजों में आधा दर्जन से अधिक नेताओं, एक कुख्यात माफिया और दो ड्रग इंस्पेक्टरों को दी गई राशि का विवरण भी मिला है। छापे के दौरान दिल्ली स्थित एबॉट कंपनी से खरीदे गए फेंसेडिल सिरप के बिल और फर्जी फर्मों के बीच लेन-देन के दस्तावेज भी मिले, जिससे एबॉट कंपनी के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अधिकारियों को संदेह है कि शुभम को फर्जी बिलिंग के लिए बंद पड़ी फर्मों का विवरण ड्रग इंस्पेक्टरों ने मुहैया कराया था। इसके अलावा, जिन फर्मों के लाइसेंस निलंबित हो चुके थे, उनका नाम और पता भी उपलब्ध कराया गया था। इस कारण अब ईडी के अधिकारी उन ड्रग इंस्पेक्टरों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, जो पिछले तीन वर्षों के दौरान वाराणसी में तैनात रहे थे, और जल्द ही उनसे पूछताछ की योजना बना रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि शुभम ने 13 जिलों की 177 फर्मों के नाम पर फर्जी बिलिंग की, जबकि सिरप की पूरी खेप त्रिपुरा भेजी गई, ताकि उसे बांग्लादेश में तस्करी किया जा सके।
तीन फार्मा कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी
नशीले कफ सिरप के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े मामले में पुलिस तीन फार्मा कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है, जो दागी फर्मों को सुपर स्टॉकिस्ट बनाकर सिरप की आपूर्ति करती थीं। इनमें हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित एबॉट फार्मास्युटिकल्स भी शामिल है, जिसने सबसे ज्यादा सिरप की आपूर्ति की थी। कंपनी पहले विभोर राणा और विशाल सिंह को सिरप की आपूर्ति कर रही थी, लेकिन जब उनका माल पकड़ा गया तो उसने शुभम जायसवाल को सुपर स्टॉकिस्ट बना दिया। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब स्थित लेबोरेट फार्मा भी जांच के दायरे में है।

