Sunday, March 15, 2026
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टीबी की दवाइयों का टोटा, भटक रहे मरीज

  • बाजार में नहीं मिल रहीं टीबी की दवाइयां

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिला अस्पताल स्थित टीबी सेंटर में टीबी की दवाइयों की कमी के साथ-साथ अब बाजार में भी इन दवाइयों की शार्टेज हो रही है। मरीज टीबी की दवाइयां लेने को भटक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त करने को मुहिम छेड़ रखी है। इस मुहिम में जहां लोगों को टीबी के प्रति सचेत किया जा रहा है। वहीं, मरीजों को टीबी सेंटर पर उपचार कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। टीबी का पता लगाने के लिए जिला अस्पताल में टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच नि:शुल्क की जाती है और उन्हें दवाई भी नि:शुल्क दी जाती है।

नि:क्षय पोषण योजना के तहत पंजीकृत क्षय रोगियों को इलाज पूरा होने तक पोषण के लिए डीबीटी के माध्यम से 500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद् भी दी जाती है। जनपद में लगभग 12 हजार टीबी के मरीज हैं। इनमें करीब 80 प्रतिशत मरीजों का उपचार सरकारी टीबी सेंटर में किया जा रहा है। 20 प्रतिशत मरीज प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। जिला टीबी सेंटर को शासन से टीबी के मरीजों के उपचार के लिए दवाई भेजी जाती है, लेकिन यह व्यवस्था आजकल डामाडोल चल रही है। काफी दिनों से शासन से यहां टीबी की दवाई नहीं भेजी जा रही।

दवाई का संकट होने पर शासन ने बाजार से 2 डी व 3 डी कॉम्बीनेशन किट खरीदने के निर्देश दिए, लेकिन उक्त दवाई उपलब्ध नहीं है। ऐसे में टीबी के मरीज इलाज को परेशान हैं। दवाइयां समय पर न मिलने पर इलाज का रूटीन टूट जाएगा। दवाइयों के खाने में गैप होने पर मरीज को नए सिरे से इलाज कराना पड़ेगा। ऐसे में यहां टीबी के और अधिक फैैलने का खतरा भी खड़ा हो गया है। मरीज दवाई के लिए परेशान हैं। वे टीबी सेंटर पर दवाई के लिए भटक रहे हैं।

टीबी की दवाई की कमी नहीं: सीएमओ

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का कहना है कि शासन से टीबी की दवाई की सप्लाई में बाधा आ रही है। बाजार से दवाइयां खरीदकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। टीबी की दवाइयों की कमी नहीं है। हालांकि बाजार में टीबी की दवाई की कमी का पता है।

बाजार में शार्ट चल रहीं टीबी की दवाइयां: रजनीश

केमिस्ट एंड ड्रागिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि टीबी की दवाइयां बाजार में कम दुकान रखते हैं। इसकी हर दवाई का हिसाब स्वास्थ्य विभाग को देना पड़ा है। टीबी की दवाइयों पर प्रोफिट बहुत कम है, इसलिए दुकानदार टीबी की दवाइयां नहीं रखते। टीबी का इलाज करने वाले अधिकांश प्राइवेट डाक्टर की क्लीनिक में या क्लीनिक के पास मेडिकल स्टोर हैं। वहां टीबी की दवाई मिलती है, लेकिन कुछ दिनों से बाजार में टीबी की दवाई की शार्ट सुनी जा रही है, इसकी वजह पता की जाएगी।

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