जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मकर संक्रांति भारत में प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। यह त्योहार एक धार्मिक उत्सव के साथ-साथ नई फसल और नई ऋतु के आगमन के लिए मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति सूर्यदेव के मकर राशि में गोचर करने पर मनाई जाती है।
ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं। इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में जाते हैं। शनिदेव को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है, इस कारण से यह दिन पिता और पुत्र के मिलन का दर्शाता है। आमतौर पर यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल का कहना है कि संक्रांति की पूजा के लिए चौकी पर लाल चंदन से अष्टदल कमल बनाएं। इसके बाद सूर्यदेव का चित्र या तस्वीर चौकी पर स्थापित करें और एक तांबे के लोटे में जल लेकर चौकी पर रखें और हाथ में अक्षत लेकर सूर्यदेव का आह्वान करें और सूर्यदेव को लाल चंदन का तिलक करे। इसके बाद उन्हें लाल पुष्पों की माला पहनाएं और लाल पुष्प अर्पित करें और फिर सूर्यदेव के मंत्रों का जप करे और उनका विधिवत पूजन करें।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने का विशेष महत्व
माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से खिचड़ी बनाने खाने और दान करने का विशेष महत्व है। इसलिए बहुत सी जगहों पर इस पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि मकर संक्रांति को क्षेत्र के अरधार पर भी मनाया जाता है।
जैसे उत्तर भारतीय हिंदुओं और सिखों द्वारा इसे माघी कहा जाता है और लोहड़ी से पहले होता है। वहीं महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना, मध्य भारत में सुकरात, असमिया द्वारा माघ बिहुए और तमिलों द्वारा थाई पोंगल या पोंगल को भी पौष संक्रांति कहा जाता है। गुजरात में मकर संक्रांति के उत्सव को पतंगबाजी का आयोजन करके भी मनाया जाता है।

