भाई साहब नमस्ते, क्या आप भी पावन घाट पर स्नान करने आए हैं। उन्होंने प्रतिउत्तर में कहा हां। आज बहुत पवित्र दिन जो है। आज में स्नान अपने आप को पावन कर लूंगा। मैंने भी उनका समर्थन करते हुए कहा हो…हो…बधाई हो भाई साहब। आपको फिर तो आपके मन में जो विचार ख्याल आया निश्चित रूप से एक सकारात्मक रूप लिए हुए हैं, इसका परिणाम आपको जरूर मिलेगा, इसकी में भगवान से प्रार्थना करता हूं। क्या श्रीमान जी आपके पास साबुन मिल जाएगा, में भी स्नान कर लूं। हां-हां क्यों नहीं जरूर लीजिए। हमारे पड़ोस की जान पहचान वाले दुकानदार से लाया हूं। हर बार जो साबुन लाता था, वह नहीं लाया हूं। दुकानदार ने कहा, वह इस बार मुझे ऐसा साबुन दे रहा है, जिससे तन- मन सबका का मैल धुल जाएगा।
क्या बात कर रहे हो भाई साहब, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। क्या आपका साबुन तन-मन के मैल को वास्तव में साफ कर देगा? दुकानदार ने तो कहा है भाई साहब, जरा लगा कर देखो, पहले इस्तेमाल करो, फिर विश्वास करो। तो ठीक है लाइए दीजिए आपका किराए वाला साबुन। मैं भी इससे नहा कर देखता हूं। वाह! भाई साहब, क्या कहना आपके इस अद्भुत चमत्कारिक साबुन का। इसने तो मेरे अंतर मन में छिपे सभी झूठ, फरेब, छल, कपट जैसे महा मलिन मैल को एकदम से साफ ही नहीं किया बल्कि पूरी तरह से स्वच्छ भी कर दिया है। आज में अपने आप में बहुत हल्का महसूस कर सहा हूं। इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
इन दोनों सज्जन मित्रों की यह वार्ता एक स्वार्थी नेता के कान में पहुंची तो उसने रहा नहीं गया। अपना परिचय व राजनीतिक प्रभाव दिखाते हुए उन्होंने भाई साहब से वही वाला साबुन मांगा, जिससे नहाने से उनके सारे मैल धुल गए और तन भी पवित्र हो गया। भाई साहब ने कहा, माफ करें श्रीमान, आप नेता हैं, यह साबुन आपके किसी काम का नहीं है, क्योंकि यह साबुन अपने आप को पूरी तरह से आपके ऊपर कुर्बान हो जाएगा, अपना कतरा-कतरा आप न्यौछावर कर देगा, पर आपके मन और रग-रग में भरे हुए झूठ, छल,कपट, स्वार्थ, मक्कारी, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार आदि का मैल धो नहीं पाएगा। हम सामान्य इंसानों के पाप कर्मों में और आपके पाप कर्मों में बहुत अंतर है।
खैर, आप नेताजी ठहरे। परंतु यह साबुन आपके पाप कर्म नहीं धोएगा तो बेचारा यह मुफ्त में ही बदनाम हो जाएगा। नेताजी यह सुनकर लज्जित महसूस कर रहे थे। मन ही मन सोच रहे थे कि अपने राजनीतिक जीवन में इतने गंदे काम किए हैं, जिसे यह साबुन भी पाप कर्मों को खत्म नहीं कर पाएगा। नेताजी को इतनी आत्मग्लानि हुई कि यह जोर-जोर से रोने लगेऔर भगवान से माफी मांगने लगे। नेताजी की पत्नी ने यह देखा तो झंझोड़ कर उठाया और कहा, अरे नेताजी, आप किस विषय में भगवान से माफी मांग रहे हो। नेताजी की आंख खुली तो उन्हें पता चला कि यह हकीकत नहीं है बल्कि यहा तो एक सपना है जो वे गहरी नींद में देख रहे थे।

