- स्टांप घोटाले के मुकदमे में बढ़ाए जाएंगे कई लोगों के नाम, उपनिबंधक कार्यालयों में मची खलबली
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाले स्टांप घोटाले की जांच एसआईटी टीम ने तेज कर दी है। एसआईटी टीम लगातार सर्विलांस के साथ मिलकर वांटेड चल रहे 25 हजार के इनामी विशाल वर्मा की तलाश में छापेमारी कर रही है, लेकिन वह बार-बार पुलिस टीम से बचकर निकल रहा है। एसआईटी टीम के नोडल एसपी क्राइम अवनीश कुमार का कहना है कि पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा, चाहे वह दस्तावेज लेखक, कोई बड़ा व्यापारी, कोई सरकारी अधिकारी, कोई सरकारी कर्मचारी हो, पूरे स्टांप घोटाले में जो भी सलिप्त होगा सभी जेल जाएंगे। उपनिबंधक कार्यालय में तैनात तत्कालीन अधिकारियों को भी नोटिस भेजकर तलब किया जा रहा है।
मेरठ में साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाले में रोज नए नाम सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल से यह मामला दबा हुआ था। व्यापारियों को नोटिस मिलने के बाद यह मामला तूल पकड़ लिया। स्टांप विभाग की तरफ से 950 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।अब तक 450 करीब लोग स्टांप के रुपये जमा कर चुके हैं। व्यापारियों ने विशाल वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सारे स्टांप विशाल वर्मा से खरीदे। लोगों की तहरीर पर विशाल वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जब से वह फरार है। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है।
सारे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करके एसपी क्राइम अवनीश कुमार को नोडल अधिकारी बनाया है। एसपी क्राइम अवनीश कुमार का कहना है कि स्टांप घोटाले की जांच शुरू कर दी है। सबसे पहले उनका फोकस विशाल वर्मा की गिरफ्तारी पर है। उसके लिए चार टीमें लगा रखी है। इसके साथ तत्कालीन उपनिबंधक अधिकारियों को नोटिस भेजे गए है। स्टांप घोटाले में ठगी का शिकार हुए लोगों के बयान नोट किए जा रहे हैं। इसके साथ बैनामें में लगाए गए स्टांप पेपर फोरेसिंक लैब नासिक भेजे जाएंगे। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि स्टांप पेपर नकली है या चोरी के है।
ब्याज माफी के लिए लिखी चिट्ठी
एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार का कहना कि उन्होंने पीड़ितों के ब्याज माफी के लिए डीएम मेरठ को चिट्ठी लिख दी है, जो जिलाधिकारी दीपक मीणा के हस्ताक्षर होने के बाद शासन को भेजी जाएगी।
फर्जी स्टांप बेचने वालों की आॅडियो वायरल
एक आॅडियो भी वायरल हो रही है। जिसमें 25 लाख रुपयों का लेन-देन की बात सुनाई दे रही है। पुलिस ने वह आॅडियो भी कब्जे में ले ली है। पुलिस का कहना है कि इससे भी जांच में शामिल किया जाएगा।
स्टांप वेंडर है पुलिस के निशाने पर
व्यापार मंडल की एक बैठक कमिश्नर पार्क में हुई। मंडल के जिला अध्यक्ष जीतू सिंह नागपाल ने बताया कि एक स्टांप वेंडर है। कचहरी गेट के सामने हनुमान मंदिर के बराबर में उसका आफिस है।
रिटायर्ड है, फिर भी संभाल रहे उपनिबंधक कार्यालय की कमान
मेरठ: शहर में साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाला होने के बाद भी उपनिबंधक कार्यालयों की कमान रिटायर्ड कर्मचारी संभाल रहे हैं। वह मलाईदार सीट पर बैठकर लोगों के मकान व बैनामों की रजिस्ट्री का काम देख रहे है। जबकि मेरठ के छह उपनिबंधक कार्यालयों में रोज की करोड़ों रुपये की रजिस्ट्री होती है। अभी हाल में ही साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाला सामने आया है। जिसमें एसआईटी की जांच में उपनिबंधक कार्यालयों में तैनात रहे पूर्व अधिकारियों पर भी शक की सूई घूम रही है। उपनिबंधक कार्यालय की नियमावली में है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति की आफिस में बिना आदेश के तैनाती नहीं की जा सकती।
जनपद में रहने वाले लोगों के लिए उपनिबंधक कार्यालय मवाना, सरधना में बने हुए है। इसके साथ शहर में रहने वाले लोगों के लिए उपनिबंधक प्रथम व तृतीय मेडा आफिस व उपनिबंधक द्वितीय व चतुर्थ कचहरी परिसर में बना हुआ है। मेरठ में हाल में ही साढ़े सात करोड़ का स्टांप घोटाला सामने आया है। जिसमें सबसे ज्यादा घोटाला मेरठ चतुर्थ व द्वितीय कार्यालय में सामने आया है। वहीं पर सबसे ज्यादा 25-25 हजार के स्टांप पेपर खपाए गए है।
डीएम से जीतू नागपाल व अन्य व्यापारियों ने शिकायत की उपनिबंधक कार्यालय द्वितीय में तैनात क्लर्क राजेंद्र त्यागी व तोताराम पिछले दो साल पहले रिटायर हो चुके हैं। इसके बाद भी वह मलाईदार सीट पर बैठकर लोगों के बैनामे का काम देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री आफिस में करोड़ों की रजिस्ट्री होती है। इनका लेखा जोखा किसी प्राइवेट व्यक्ति के पास नहंी होना चाहिए। जब वह रिटायर हो गए हो किसकी परमिशन से वहां पर काम कर रहे हैं। डीएम ने सारे मामले की जांच के आदेश दिए।
तैनाती से पहले कर रहे थे काम
एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि रजिस्ट्री कार्यालय द्वितीय में तैनात राजेंद्र त्यागी व तोता राम दो साल पहले रिटायर हो गए हैं। उनकी मेरठ में एआईजी स्टांप पद पर तैनाती पिछले साल जुलाई में हुई। वह उनकी तैनाती से पहले रिटायर्ड होने के बाद आफिस में काम कर रहे थे। शिकायत मिलने पर उन्हें बीच में उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद वह दोबारा से काम करने लगे। उपनिबंधक द्वितीय रजिस्ट्रार से जानकारी मांगी जा रही है। वह किसी के आदेश पर काम कर रहे हैं।

