Wednesday, June 17, 2026
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नालों का साइज किया कम, बरसात में जलमग्न होगा महानगर

  • ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रहा निगम का खेल
  • दुकानदारों से अवैध वसूली कर दी जा रही सरकारी जमीन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: उफ! जिन नालों को अंग्रेजों ने करीब एक शताब्दी पहले थोड़ी आबादी के पानी की निकासी के लिए बनाया था। उसकी गहराई और चौड़ाई को नगर पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों कम कर डाला। इसका खमियाजा महानगर की जनता को बरसात में जलभराव की समस्या के रूप में भुगतना पड़ेगा। करीब 100 वर्ष पूर्व अंग्रेजों ने महानगर की पानी की निकासी के लिए सदर तहसील से लेकर बच्चा पार्क तक और खैर नगर गेट से बच्चा पार्क तक, छतरी वाला पीर तिराहा से किशनपुरी तक मेन नालों का निर्माण कराया था।

इसके अलावा इन नालों से खैरनगर, लाला का बाजार, कोटला, वैली बाजार, कबाड़ी बाजार, देहली गेट, कंबोह गेट, बागपत गेट, बुढ़ाना गेट, गुदड़ी बाजार, पूर्वा अहिरान, शाहपीर गेट, शोहराब गेट, शाहघासा, सराय बहलीम आदि मोहल्लों के नालों को जोड़ा गया था। मेन नाले करीब 14 फीट गहरे और 10 फीट चौड़े बनाए गए थे। इसी तरह छोटे नाले अंग्रेजों ने आठ फीट गहरे और चार फीट चौड़े बनाए थे। उस जमाने में शहर की आबादी करीब 20 हजार थी, लेकिन धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई।

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आबादी बढ़ने के साथ पानी का प्रयोग बढ़ना स्वाभाव्विक है। नगर पालिका का गठन होने पर कुछ और नाले बनाए गए। नालों की गहराई और चौड़ाई का मापदंड अंग्रेजों वाला था। इसके बाद नगर महापालिका बनी तो नालों का और विस्तार हुआ। आबादी बढ़ने के साथ शहर में जलभराव की समस्या खड़ी होने लगी। इसके बाद नगर निगम बनने पर लोगों को लगा कि शहर का विकास होगा और उन्हें जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

नगर निगम के अधिकारियों ने अब नालों की भूमि को ठेकेदारों से सांठगांठ करके बेचने का खेल किया। छतरी वाले पीर तिराहे से लेकर किशनपुरी, ओडियन के आगे से पुराना कमेला तक नाले का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। ठेकेदार ने नाले के मलबे को उठवाने के खर्च से बचने के लिए नाले के मलबे को नाले में ही डलवाकर उसकी गहराई को 14 फीट से घटारकर मात्र आठ फीट कर दिया।

जनाब! ये पार्क नहीं, आबूनाला है

कैंट बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही के चलते आबू नाला सिल्ट से बुरी तरह से अटा पड़ा है। जनाब! ये पार्क नहीं, आबूनाला है। इस नाले में कई-कई फीट ऊंची खरपतवार खड़ी हो गई है। नाले को देखकर यह लगता ही नहीं यह कोई नाला है। ऐसा लगता है। जैसे शहर में कोई खेत खड़ा हो गया है। कैंट बोर्ड के अधिकारी नाले की सफाई को लेकर गंभीर नहीं है । इस नाले की तली झाड़ सफाई कई वर्ष से नहीं कराई गई। ऐसे में आने वाली बरसात में कैंट के नागरिकों को भारी जलभराव का सामना करना पड़ेगा।

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